श्रीरामचरितमानस में व्याप्त लोकमंगल की भावना

Authors

  • Uma Shrivas Student, Department of Hindi, Dr C V Raman University Kota Bilaspur, Chhattisgarh, India.
  • Sahid Hussain Assistant Professor, Department of Hindi , Dr CV Raman University Kota Bilaspur, Chhattisgarh, India.

Keywords:

लोक मंगल, जगत कल्याण, समत्व, सद्भावना, अपनत्व, आदर्श समाज।

Abstract

जड़ चेतन जग जीव जत, सकल राममय जानि।
बंदउठसबके पद कमल, सदा जोरि जà¥à¤— पानि ।।1 (बालकाणà¥à¤¡/ दोहा 7 ग)
देव, दनà¥à¤œ, नर, नाग, खग, पà¥à¤°à¥‡à¤¤, पितर, गंधरà¥à¤µà¥¤
बंदउठकिनà¥à¤¨à¤° रजनिचर, कृपा करहà¤à¥ अब सरà¥à¤µà¥¤à¥¤2 (बालकाणà¥à¤¡/ दोहा 7 घ)
आकर चारि लाख चौरासी। जाति जीव जल थल नभ वास4ी।
सीय राममय सब जग जानी। करउठपà¥à¤°à¤£à¤¾à¤® जोरि जà¥à¤— पानी।।3 (बालकाणà¥à¤¡/ दोहा 8/ चौपाई1,2)

राम चरित मानस तà¥à¤²à¤¸à¥€ साहितà¥à¤¯ का महाकावà¥à¤¯ है। इसे कलियà¥à¤—ीन सामवेद भी कहा जाता है। गोसà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ तà¥à¤²à¤¸à¥€à¤¦à¤¾à¤¸ जी ने मानस में लोकमंगल की कामना को सरà¥à¤µà¥‹à¤ªà¤°à¤¿ रखा। लोकमंगल अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤ जन सामानà¥à¤¯ से जन विशेष तक। मंगल का अभिपà¥à¤°à¤¾à¤¯ है शà¥à¤­ हित चिंतन। तà¥à¤²à¤¸à¥€à¤¦à¤¾à¤¸ जी कहते हैं कि इस पà¥à¤°à¤•ृति की संरचना में जड़-चेतन, सà¥à¤¥à¤¾à¤µà¤°-जंगम सभी का कलà¥à¤¯à¤¾à¤£ हो कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि सभी में परमातà¥à¤®à¤¾ का अंश है। इसीलिठतà¥à¤²à¤¸à¥€à¤¦à¤¾à¤¸ जी चेतन की सभी योनियों, देव, दानव, मनà¥à¤·à¥à¤¯, सरà¥à¤ª, पकà¥à¤·à¥€, पà¥à¤°à¥‡à¤¤, पितर, गंधरà¥à¤µ, किनà¥à¤¨à¤° à¤à¤µà¤‚ राकà¥à¤·à¤¸ सभी से पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¨à¤¾ करते हैं कि उनकी इस मंगल-कामना में सभी उनकी सहायता करें। वे इस सृषà¥à¤Ÿà¤¿ के जल-थल à¤à¤µà¤‚ गगनचारी चार लाख चौरासी योनियों में समाहित पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का कलà¥à¤¯à¤¾à¤£ चाहते हैं। गोसà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ जी की समतà¥à¤µ दृषà¥à¤Ÿà¤¿ में सभी उनके ईषà¥à¤Ÿ के पà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥‡ हैं उन सभी की वे वनà¥à¤¦à¤¨à¤¾ करते हैं।

Published

2024-08-20