मनुष्य के स्वास्थ्य संवर्धन में संगीत की भूमिका: एक विवेचनात्मक अध्ययन
Keywords:
ब्राह्मण्ड, साक्षात्कार, सत्मार्ग, चहु, व्याप्त।Abstract
आदिकाल से ही संगीत सम्पूर्ण सृष्टि का आधार माना जाता है। संगीत एक ऐसी ललित कला है। जिसके बिना हम ब्राह्मण्ड की कल्पना तथा सृष्टि की रचना ही नहीं कर सकते। संगीत मानव जीवन ही नहीं, अपितु पशु-पक्षी, जीव-जन्तु, पेड़ पौधे, वातावरण, खेत-खलियान आदि सभी पर अपना प्रभाव डालता है। सृष्टि के हर कण-कण व हवाओं में भी संगीत की एक सुरीली धुन व्याप्त है। इसी प्रकार संगीत स्वरों की वह माला है, जिसमें मानव जीवन का सम्पूर्ण सार है। संगीत मनुष्य के जन्म से लेकर मृत्यु तक जुड़ा हुआ है। कहने का आशय यह है कि संगीत मनुष्य के जीवन से चहु ओर से घिरा हुआ है। मानव जीवन के आदि से लेकर अंत तक संगीत की यात्रा का सफर करती है। संगीत आत्मा को परमात्मा से मिलाने का एक महान सेतु है, अर्थात् सुगम मार्ग है, जिससे मनुष्य जीवन का साक्षात्कार ईश्वरीय हो जाता है। ध्यान, योग, भजन, कीर्तन संगीत ही ऐसे सत्मार्ग है, जो मनुष्य को उचित दिशा में दिग्दर्शित करते हैं। यह वह ईश्वरीय मार्ग है, जिससे मनुष्य चाहकर भी कहीं गलत मार्ग पर प्रेरित हो ही नहीं सकते। संगीत मनुष्य के जीवन से कही न कही, किसी न किसी रूप से अवश्य जुड़ा हुआ है।
How to cite this article:
रीना गुप्ता, प्रतिभा रानी, मनुष्य के स्वास्थ्य संवर्धन में संगीत की भूमिका : एक विवेचनात्मक अध्ययन, Anu: a, Mul, Int, Jour, 2026; 11(3&4): 61-66.
DOI: https://doi.org/10.24321/2456.0510.202620
References
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