शिक्षा में सुधार की प्रमुख अवधारणाएँ: एक समकालीन परिप्रेक्ष्य
Keywords:
शिक्षा सुधार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, समावेशी शिक्षा, विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षा, डिजिटल शिक्षा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, शिक्षक विकास।Abstract
शिक्षा किसी भी राष्ट्र के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक विकास की आधारशिला है। बदलती सामाजिक आवश्यकताओं, तकनीकीप्रगति, वैश्वीकरण तथा ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था के विस्तार ने शिक्षा व्यवस्था में निरंतर सुधार की आवश्यकता को बढ़ाया है। शिक्षा सुधार का उद्देश्यकेवल पाठ्यक्रम अथवा शिक्षण-पद्धति में परिवर्तन करना नहीं है, बल्कि ऐसी समग्र एवं समावेशी शिक्षा व्यवस्था विकसित करना है जो विद्यार्थियों मेंज्ञान, कौशल, रचनात्मकता, आलोचनात्मक चिंतन, नैतिक मूल्यों तथा सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास कर सके। प्रस्तुत शोध-पत्र में शिक्षा सुधारकी प्रमुख अवधारणाओं—गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, समानता एवं समावेशन, विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षा, कौशल एवं दक्षता-आधारित शिक्षा, डिजिटल शिक्षा, शिक्षक विकास, सतत मूल्यांकन, बहुविषयक शिक्षा तथा जीवनपर्यंत अधिगम—का विश्लेषण किया गया है। भारतीय संदर्भ में राष्ट्रीय शिक्षा नीति2020 द्वारा प्रस्तावित सुधारों को भी विशेष रूप से रेखांकित किया गया है। अध्ययन का निष्कर्ष है कि शिक्षा सुधार एक सतत प्रक्रिया है, जिसकीसफलता के लिए नीतिगत परिवर्तन के साथ-साथ संस्थागत क्षमता, शिक्षक प्रशिक्षण, तकनीकी संसाधन, सामाजिक सहभागिता और प्रभावी मूल्यांकनप्रणाली आवश्यक हैं।
How to cite this article:
डॉ महेंद्र प्रताप सिंह, शिक्षा में सुधार की प्रमुख अवधारणाएँ: एक समकालीन परिप्रेक्ष्य, Anu: a, Mul, Int, Jour, 2026; 11(3&4): 72-76.
DOI: https://doi.org/10.24321/2456.0510.202624