आधुनिक शिक्षा और छात्र संवेग: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन

Authors

  • दीपक कुमार सहायक आचार्य एवं शोध निर्देशक, इतिहास विभाग, एस.एस.वी. कॉलेज, हापुड़, उत्तर प्रदेश, भारत।
  • विकास कुमार शोध छात्र, इतिहास विभाग, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ, उत्तर प्रदेश, भारत।

Keywords:

आधुनिकरण, व्यक्तित्व विकास, किशोरावस्था, माध्यमिक शिक्षा, पहचान का संकट, मानसिक तनाव।

Abstract

प्रस्तुत शोध पत्र माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर की शिक्षा व्यवस्था में हो रहे तीव्र आधुनिकरण, डिजिटल रूपांतरण, तथा वैश्वीकृत पाठ्यक्रम पद्धतियों के आलोक में किशोरावस्था के विद्यार्थियों की संवेगात्मक परिपक्वता और संपूर्ण व्यक्तित्व विकास पर पड़ने वाले प्रभावों का गहन विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। आधुनिक शिक्षा प्रणाली ने जहाँ एक ओर तकनीकी दक्षता, सूचना तक पहुँच और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के नवीन द्वार खोले हैं, वहीं दूसरी ओर इसके तीव्र और असंतुलित क्रियान्वयन ने किशोरों के आंतरिक मनोविज्ञान, संवेगात्मक संतुलन और सामाजिक-पारस्परिक संबंधों में गंभीर असंतुलन और चुनौतियाँ उत्पन्न कर दी हैं। किशोरावस्था मानव जीवन का वह संवेदनशील पड़ाव है जहाँ शारीरिक बदलावों के साथ-साथ पहचान निर्माण और संवेगात्मक स्थिरता का निर्धारण होता है। इस अवस्था में आधुनिक शिक्षा का अति-प्रतिस्पर्धात्मक परिवेश, डिजिटल उपकरणों पर अत्यधिक निर्भरता, एल्गोरिदम-संचालित सामाजिक माध्यमों का दबाव, और पारंपरिक पारिवारिक-सामाजिक मूल्यों का क्षरण विद्यार्थियों को गंभीर मानसिक तनाव, एकाकीपन, चिंता, और पहचान के संकट की ओर धकेल रहा है। यह अध्ययन गुणात्मक एवं विश्लेषणात्मक शोध पद्धति पर आधारित है, जिसके अंतर्गत माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यार्थियों के दैनिक व्यवहार, शैक्षणिक दबाव, और मनोवैज्ञानिक परिवर्तनों का व्यावहारिक मूल्यांकन किया गया है। शोध के निष्कर्ष यह दर्शाते हैं कि आधुनिकरण ने शिक्षा को 'ज्ञान' और 'चरित्र निर्माण' की प्रक्रिया के स्थान पर केवल 'परिणाम' और 'तकनीकी कौशल' तक सीमित कर दिया है, जिसके फलस्वरूप विद्यार्थियों में आत्म-नियंत्रण, सहनशीलता, सहानुभूति और संवेगात्मक दृढ़ता जैसे मौलिक गुणों का ह्रास हो रहा है। शोध पत्र में यह भी रेखांकित किया गया है कि भारतीय शिक्षा दर्शन के क्लासिकीय मूल्यों तथा भारतीय शिक्षाविदों के विचार-बिंदुओं के समन्वय द्वारा ही इस संकट का स्थाई समाधान संभव है क्योंकि शिक्षा का अंतिम लक्ष्य केवल अकादमिक सफलता प्राप्त करना नहीं, बल्कि एक संतुलित, संवेगात्मक रूप से परिपक्व और चरित्रवान व्यक्तित्व का निर्माण करना है।

How to cite this article:

दीपक कुमार, विकास कुमार, आधुनिक शिक्षा और छात्र संवेग: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन, Anu: a, Mul, Int, Jour, 2026; 11(3&4): 77-85.

DOI: https://doi.org/10.24321/2456.0510.202625

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Published

2026-10-23

How to Cite

दीपक कुमार, & कुमार व. (2026). आधुनिक शिक्षा और छात्र संवेग: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन. Anusanadhan: A Multidisciplinary International Journal (In Hindi), 11(3&4), 77-85. Retrieved from http://thejournalshouse.com/index.php/Anusandhan-Hindi-IntlJournal/article/view/2533