वैदर्भी हिंदी साहित्य

Authors

  • ए. अनुराधा पीजीटी हिंदी, एमजेपीटीबीसीडब्ल्यूआरएस (बालक), मेदक, तेलंगाना, भारत ।

Keywords:

वैदर्भी हिंदी, विदर्भ, संत साहित्य, महानुभाव संप्रदाय, वारकरी संप्रदाय

Abstract

वैदर्भी हिंदी साहित्य महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में विकसित हिंदी साहित्य की एक महत्त्वपूर्ण धारा है। इस क्षेत्र में हिंदी साहित्य के आरंभिक विकास में संत साहित्य की उल्लेखनीय भूमिका रही। महानुभाव संप्रदाय और वारकरी संप्रदाय ने हिंदी की प्रारंभिक साहित्यिक परंपरा को समृद्ध किया। आधुनिक काल में विदर्भ के लेखकों ने हिंदी कविता, कहानी, उपन्यास और निबंध के विकास में योगदान दिया। प्रस्तुत शोधपत्र में वैदर्भी हिंदी साहित्य की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, विकास-क्रम, प्रमुख प्रवृत्तियों तथा साहित्यिक योगदान का परिचयात्मक विश्लेषण किया गया है।

How to cite this article:

ए. अनुराधा, वैदर्भी हिंदी साहित्य, Anu: a, Mul, Int, Jour, 2026; 11(3&4): 91-93.

DOI: https://doi.org/10.24321/2456.0510.202628

References

तिवारी, रामचंद्र. हिंदी साहित्य का इतिहास। (प्रकाशन-विवरण संस्करण के अनुसार जोड़ें।)

मिश्र, गणेशदत्त. महाराष्ट्र का हिंदी साहित्य। (प्रकाशन-विवरण सत्यापित करके जोड़ें।)

राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के हिंदी-प्रचार संबंधी प्रकाशन।

Published

2026-11-04

How to Cite

ए. अनुराधा. (2026). वैदर्भी हिंदी साहित्य. Anusanadhan: A Multidisciplinary International Journal (In Hindi), 11(3&4), 91-93. Retrieved from http://thejournalshouse.com/index.php/Anusandhan-Hindi-IntlJournal/article/view/2534