Anusanadhan: A Multidisciplinary International Journal (In Hindi)
http://thejournalshouse.com/index.php/Anusandhan-Hindi-IntlJournal
Anusandhan: A Multidisciplinary International Journal (Hindi)Advanced Research Publicationsen-USAnusanadhan: A Multidisciplinary International Journal (In Hindi)2456-0510भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की विरासत: एक अध्ययन
http://thejournalshouse.com/index.php/Anusandhan-Hindi-IntlJournal/article/view/2519
<p>“भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अन्तर्गत भारतीय सभ्यता के वैज्ञानिक एवं तकनीकी विकास की दीर्घकालीन परंपरा का वर्णन मिलता है। भारत में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का विकास केवल आधुनिक काल की देन नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें प्राचीन काल में गहराई से विद्यमान रही हैं। सिंधु-सरस्वती सभ्यता की नगर-योजना, जल-निकासी व्यवस्था, माप-तौल तथा स्थापत्य-कौशल भारतीय तकनीकी ज्ञान की उन्नति को प्रदर्शित करते हैं। वैदिक एवं उत्तरवैदिक काल में गणित, खगोल-विज्ञान, चिकित्सा और धातु-विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति हुई। भारतीय गणितीय परंपरा ने शून्य, दशमलव पद्धति, बीजगणित और ज्यामिति के विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया। आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त और भास्कराचार्य जैसे विद्वानों ने गणित एवं खगोल-विज्ञान को समृद्ध किया। चिकित्सा के क्षेत्र में चरक और सुश्रुत की परंपरा ने आयुर्वेद तथा शल्य-चिकित्सा को व्यवस्थित स्वरूप प्रदान किया। इसी प्रकार धातु-विज्ञान में लौह-स्तंभ तथा उच्च गुणवत्ता वाले लौह एवं इस्पात निर्माण की तकनीक भारतीय तकनीकी दक्षता के प्रमाण हैं। मध्यकाल में जल-प्रबंधन, स्थापत्य, कृषि, वस्त्र-निर्माण, नौवहन और धातु-कला में निरंतर विकास हुआ। भारतीय वैज्ञानिक ज्ञान का प्रभाव एशिया तथा अन्य क्षेत्रों तक भी पहुँचा। प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की प्रमुख उपलब्धियों, उनकी सामाजिक-आर्थिक उपयोगिता तथा वैश्विक प्रभाव का विश्लेषण करना है। यह अध्ययन भारतीय वैज्ञानिक परंपरा की निरंतरता, विविधता और आधुनिक विज्ञान के विकास में उसके योगदान को समझने का प्रयास करता है।</p> <p><strong>How to cite this article:</strong></p> <p>अजय कुमार मिश्रा, सन्दीप कुमार सरोज, भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की विरासत: एक अध्ययन, Anu: a, Mul, Int, Jour, <em>Vol 11, 2026 (Special Issue 2): Pg. No. 1-6</em></p> <p><strong>DOI: </strong><a href="https://doi.org/10.24321/2456.0510.202609">https://doi.org/</a>10.24321/2456.0510.202622</p>अजय कुमार मिश्रासन्दीप कुमार सरोज
Copyright (c) 2026 Anusanadhan: A Multidisciplinary International Journal (In Hindi)
2026-10-192026-10-1911Special (Issue) - 216भारतीय ज्ञान परंपरा की समकालीन प्रासंगिकता
http://thejournalshouse.com/index.php/Anusandhan-Hindi-IntlJournal/article/view/2429
<p>भारतीय ज्ञान परंपरा विश्व की प्राचीनतम, समृद्धतम और अनवरत प्रवाहित होने वाली वैचारिक एवं वैज्ञानिक धाराओं में से एक है। यह केवल आध्यात्मिक साधना तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें विज्ञान, गणित, खगोलशास्त्र, चिकित्सा (आयुर्वेद), पर्यावरण, सुशासन, धातु विज्ञान और सामाजिक दर्शन का ऐसा विस्तृत भंडार है जिसने सदियों तक वैश्विक चेतना का मार्गदर्शन किया है।<strong><sup> [1]</sup></strong></p> <p>आधुनिक युग में जब विश्व जलवायु परिवर्तन, मानसिक अशांति, उपभोक्तावादी होड़ और सामाजिक विखंडन जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है, तब भारतीय दृष्टि—जो समग्रता (Holism) और अंतर्संबंधों पर आधारित है—अत्यंत प्रासंगिक हो जाती है। यह शोध पत्र भारतीय ज्ञान परंपरा के मूल तत्वों का विश्लेषण करता है और वर्तमान समय में इसकी व्यावहारिक उपयोगिता तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के संदर्भ में इसकी भूमिका को रेखांकित करता है।</p> <p><strong>How to cite this article:</strong></p> <p>शाश्वत चन्देल, सहायक आचार्य, समाजशास्त्र विभागए दिग्विजय नाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालयए गोरखपुरए उत्तर प्रदेश, Anu: a, Mul, Int, Jour, <em>Vol 11, 2026 (Special Issue 2): Pg. No. 7-11</em></p>शाश्वत चन्देल
Copyright (c) 2026 Anusanadhan: A Multidisciplinary International Journal (In Hindi)
2026-10-192026-10-1911Special (Issue) - 2711भारतीय संस्कृति का वैश्विक प्रभाव: एक अध्ययन
http://thejournalshouse.com/index.php/Anusandhan-Hindi-IntlJournal/article/view/2520
<p>भारतीय संस्कृति विश्व की प्राचीन एवं समृद्ध संस्कृतियों में से एक है, जिसने अपने ज्ञान, दर्शन, धर्म, कला, साहित्य, विज्ञान और जीवन-मूल्यों के माध्यम से विभिन्न देशों और सभ्यताओं को प्रभावित किया है। “भारतीय संस्कृति का वैश्विक प्रभाव एक अध्ययन” विषय के अंतर्गत भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं के अंतरराष्ट्रीय प्रसार एवं उनके प्रभाव का अध्ययन किया गया है। भारत की वसुधैव कुटुम्बकम् अहिंसा, सहिष्णुता, समन्वय और सर्वे भवन्तु सुखिनः जैसी अवधारणाओं ने विश्व को मानवीय एकता एवं शांति का संदेश दिया। बौद्ध धर्म के प्रसार के माध्यम से भारतीय दर्शन चीन, जापान, कोरिया, तिब्बत तथा दक्षिण-पूर्व एशिया तक पहुँचा। योग और आयुर्वेद ने आधुनिक विश्व में भारतीय स्वास्थ्य एवं जीवन-पद्धति की पहचान को व्यापक बनाया है। भारतीय गणित, खगोल विज्ञान, चिकित्सा तथा दर्शन ने भी वैश्विक ज्ञान-परंपरा को प्रभावित किया। भारतीय कला, स्थापत्य, संगीत, नृत्य, साहित्य और भाषा का प्रभाव अनेक देशों में दिखाई देता है। आधुनिक समय में योग, ध्यान, भारतीय भोजन, सिनेमा और भारतीय दर्शन के माध्यम से यह प्रभाव और विस्तृत हुआ है। अतः भारतीय संस्कृति का वैश्विक प्रभाव केवल ऐतिहासिक आदान-प्रदान तक सीमित नहीं, बल्कि समकालीन विश्व में भी निरंतर विकसित हो रहा है।</p> <p><strong>How to cite this article:</strong></p> <p>अजय कुमार मिश्रा, रामपाल यादव, भारतीय संस्कृति का वैश्विक प्रभाव: एक अध्ययन, Anu: a, Mul, Int, Jour, <em>Vol 11, 2026 (Special Issue 2): Pg. No. 12-17</em></p> <p><em><strong>DOI: </strong><a href="https://doi.org/10.24321/2456.0510.202609">https://doi.org/</a>10.24321/2456.0510.202623</em></p>अजय कुमार मिश्रारामपाल यादव
Copyright (c) 2026 Anusanadhan: A Multidisciplinary International Journal (In Hindi)
2026-10-192026-10-1911Special (Issue) - 21217