https://thejournalshouse.com/index.php/Anusandhan-Hindi-IntlJournal/issue/feed Anusanadhan: A Multidisciplinary International Journal (In Hindi) 2026-03-02T07:39:43+00:00 ADR Publications info@adrpublications.in Open Journal Systems Anusandhan: A Multidisciplinary International Journal (Hindi) https://thejournalshouse.com/index.php/Anusandhan-Hindi-IntlJournal/article/view/1968 डिजिटल युग में हिंदी साहित्यिक पुस्तकों की उपेक्षा और युवा पाठकों की प्राथमिकताएँ: पूर्वी दिल्ली का क्षेत्रीय विश्लेषण 2026-03-02T07:29:49+00:00 Aparna Dias aparnadias29@gmail.com <p>हिंदी साहित्य भारतीय समाज की सांस्कृतिक चेतना और मानवीय मूल्यों का आधार रहा है। यह केवल भाषा की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि जीवन के अनुभवों, संवेदनाओं और विचारों की गहराई का प्रतीक है। किंतु तकनीकी युग के इस दौर में, जब जीवन का प्रत्येक क्षेत्र डिजिटल माध्यमों से जुड़ चुका है, तब साहित्यिक पुस्तकों के प्रति युवाओं की रुचि में उल्लेखनीय परिवर्तन देखा गया है। मुद्रित पुस्तकों की जगह अब ई-पुस्तकों, श्रव्य पुस्तकों और इंटरनेट आधारित सामग्री ने ले ली है, जिससे पारंपरिक पठन संस्कृति प्रभावित हुई है।</p> <p>यह अध्ययन पूर्वी दिल्ली क्षेत्र के 14 से 30 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं पर किया गया, जिसमें कुल 95 उत्तरदाताओं से प्राप्त विचारों के आधार पर विश्लेषण किया गया। परिणामों से स्पष्ट हुआ कि युवाओं में साहित्यिक पुस्तकों के प्रति जिज्ञासा बनी हुई है, परंतु नियमित पठन की आदत में कमी आई है। बयालिस प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि वे कभी-कभी साहित्यिक पुस्तकें पढ़ते हैं, जबकि इक्कीस प्रतिशत युवाओं ने स्वीकार किया कि वे अब पुस्तकें नहीं पढ़ते। ई-पुस्तकों का आकर्षण उनकी सरल उपलब्धता, कम लागत और आधुनिकता के कारण बढ़ा है, किंतु इस सहजता ने साहित्यिक गहराई और एकाग्रता में कमी उत्पन्न की है।</p> <p>अध्ययन यह भी दर्शाता है कि यदि साहित्यिक पुस्तकों को आधुनिक तकनीकी माध्यमों में प्रस्तुत किया जाए, जैसे श्रव्य पुस्तकों, साहित्यिक अनुप्रयोगों और सामाजिक मंचों के माध्यम से, तो हिंदी साहित्य को पुनः युवा पीढ़ी के बीच लोकप्रिय बनाया जा सकता है। डिजिटल युग हिंदी साहित्य के लिए चुनौती के साथ-साथ एक नया अवसर भी प्रस्तुत करता है, जिससे उसकी परंपरा आधुनिक रूप में जीवित रह सकती है।</p> 2026-03-02T00:00:00+00:00 Copyright (c) 2026 Anusanadhan: A Multidisciplinary International Journal (In Hindi)