प्राचीन भारत में पर्यावरण पर चिन्तन

Authors

  • Rameshwar Pandey Assistant Professor, Department of Ancient History, National Post Graduate College, Barhalganj Gorakhpur, Uttar Pradesh, India.

Keywords:

प्राचीन भारत; पर्यावरण; वेद; पुराण; महाभारत; ऋग्वेद; अहिंसा।

Abstract

इस जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤µà¤°à¥à¤§à¤• आलेख में लेखक ने पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ भारत में परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£ पर चिंतन का पà¥à¤°à¤­à¤¾à¤µà¤¶à¤¾à¤²à¥€ ढंग से विचारपूरà¥à¤£ विशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤£ पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ किया है। सूकà¥à¤·à¥à¤® अनà¥à¤µà¥‡à¤·à¤£ और अंतरà¥à¤¦à¥ƒà¤·à¥à¤Ÿà¤¿à¤ªà¥‚रà¥à¤£ अवलोकनों के माधà¥à¤¯à¤® से, लेखक ने पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ भारत के लोगों की अपने परिवेश के साथ गहरी शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾ और गहरे संबंध पर पà¥à¤°à¤•ाश डाला है। यह अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ उस यà¥à¤— के दौरान पà¥à¤°à¤šà¤²à¤¿à¤¤ परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£à¥€à¤¯ चेतना के विभिनà¥à¤¨ पहलà¥à¤“ं पर पà¥à¤°à¤•ाश डालता है, जो मनà¥à¤·à¥à¤¯ और पà¥à¤°à¤•ृति के बीच जटिल अंतरसंबंध पर पà¥à¤°à¤•ाश डालता है। सांसà¥à¤•ृतिक पà¥à¤°à¤¥à¤¾à¤“ं, दारà¥à¤¶à¤¨à¤¿à¤• दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ोण और à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• अभिलेखों की जांच करके, लेखक ने इस बात की वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤• समठसामने लाई है कि पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ भारत में रोजमरà¥à¤°à¤¾ की जिंदगी के ताने-बाने में परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£ संबंधी चिंताà¤à¤‚ कैसे जà¥à¤¡à¤¼à¥€ हà¥à¤ˆ थीं। लेख न केवल उस अवधि में परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£à¥€à¤¯ सà¥à¤¥à¤¿à¤°à¤¤à¤¾ के महतà¥à¤µ को सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ करता है बलà¥à¤•ि यह भी मूलà¥à¤¯à¤µà¤¾à¤¨ अंतरà¥à¤¦à¥ƒà¤·à¥à¤Ÿà¤¿ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करता है कि पिछली विचारधाराà¤à¤‚ और दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ोण समकालीन परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£à¥€à¤¯ पà¥à¤°à¤µà¤šà¤¨ को कैसे सूचित कर सकते हैं। कà¥à¤² मिलाकर, यह विदà¥à¤µà¤¤à¤¾à¤ªà¥‚रà¥à¤£ कारà¥à¤¯ परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£ पर पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ भारतीय दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ोण के बारे में हमारे जà¥à¤žà¤¾à¤¨ को समृदà¥à¤§ करता है और सामाजिक मूलà¥à¤¯à¥‹à¤‚ और वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤°à¥‹à¤‚ को आकार देने में परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£-चेतना की कालातीत पà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤‚गिकता को रेखांकित करता है।

References

(1) ऋग्वेद, 6.75. 14
(2) अथर्ववेद, 10.2.8, 18.1.7
(3) वही, 8.1.5
(4) शतपथ ब्राहमण, 1.1.1.4
(5) वा०रा०, 2.95.3, 4
(6) महाभारत भीष्म पर्व, 2.19
(7) वही, अनुशासन पर्व, 5.30-31
(8) वही शान्ति पर्व, 185.5-18
(9) भविष्य पुराण, 1.54.55
(10) ब्रहम पुराण, 31.4
(11) मारकण्डेय पुराण, 101.22-23
(12) वराह पुराण, 170.38-39
(13) शिव पुराण, 5.12.17-21
(14) पद्म पुराण, 6.23.13, वराह पुराण, 12.2.39
(15) मत्स्य पुराण, 170.37
(16) भागवत पुराण, 7.14.9
(17) नरसिंह पुराण, 13.44
(18) पद्म पुराण, 50.164-192

Published

2020-05-08