प्राचीन भारत के गुरुकुल में उच्च शिक्षा का स्वरूप और विकास

Authors

  • Rameshwar Pandey

Keywords:

गुरुकुल; वैदिक ग्रंथ; व्यावहारिक शिक्षण; आत्म-नियंत्रण; विनम्रता; आचार्य; संगोष्ठी; उच्च शिक्षा ।

Abstract

भारत के पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ शैकà¥à¤·à¤£à¤¿à¤• संसà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ में जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ गà¥à¤°à¥à¤•à¥à¤² के नाम से जाना जाता है, उचà¥à¤š शिकà¥à¤·à¤¾ की पà¥à¤°à¤•ृति और विकास à¤à¤• जटिल और गहरी जड़ें जमाने वाली पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ थी जो आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤•, दारà¥à¤¶à¤¨à¤¿à¤• और वà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¹à¤¾à¤°à¤¿à¤• शिकà¥à¤·à¤£ पदà¥à¤§à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के विभिनà¥à¤¨ ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ को आपस में जोड़ती थी। इन गà¥à¤°à¥à¤•à¥à¤²à¥‹à¤‚ ने समगà¥à¤° और गहन शैकà¥à¤·à¤¿à¤• अनà¥à¤­à¤µ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करके पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ भारत के बौदà¥à¤§à¤¿à¤• परिदृशà¥à¤¯ को आकार देने में महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ भूमिका निभाई, जिसने न केवल बौदà¥à¤§à¤¿à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾à¤“ं बलà¥à¤•ि नैतिक मूलà¥à¤¯à¥‹à¤‚ और आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• विकास को भी बढ़ावा दिया। इन गà¥à¤°à¥à¤•à¥à¤²à¥‹à¤‚ में पाठà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® को वैदिक गà¥à¤°à¤‚थों, गणित, खगोल विजà¥à¤žà¤¾à¤¨, चिकितà¥à¤¸à¤¾, राजनीति, संगीत और नैतिकता जैसे विभिनà¥à¤¨ विषयों की गहरी समठविकसित करने के लिठडिज़ाइन किया गया था, जिससे à¤à¤• सरà¥à¤µà¤¾à¤‚गीण शिकà¥à¤·à¤¾ को बढ़ावा दिया गया। इसके अलावा, इन गà¥à¤°à¥à¤•à¥à¤²à¥‹à¤‚ में नियोजित शैकà¥à¤·à¤£à¤¿à¤• तरीकों ने वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤—त धà¥à¤¯à¤¾à¤¨, अनà¥à¤­à¤µà¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• शिकà¥à¤·à¤¾ और शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¥‡à¤¯ शिकà¥à¤·à¤•ों की करीबी सलाह पर जोर दिया, जिससे à¤à¤• à¤à¤¸à¤¾ पोषण वातावरण तैयार हà¥à¤† जो आलोचनातà¥à¤®à¤• सोच, रचनातà¥à¤®à¤•ता और जà¥à¤žà¤¾à¤¨ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ गहरी शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾ को पà¥à¤°à¥‹à¤¤à¥à¤¸à¤¾à¤¹à¤¿à¤¤ करता था। गà¥à¤°à¥à¤•à¥à¤²à¥‹à¤‚ में छातà¥à¤°à¥‹à¤‚ से अपेकà¥à¤·à¤¾ की जाती थी कि वे à¤à¤• अनà¥à¤¶à¤¾à¤¸à¤¿à¤¤ और संयमित जीवन वà¥à¤¯à¤¤à¥€à¤¤ करें, आतà¥à¤®-नियंतà¥à¤°à¤£, विनमà¥à¤°à¤¤à¤¾ और अपनी पढ़ाई के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ समरà¥à¤ªà¤£ का अभà¥à¤¯à¤¾à¤¸ करें, जिससे महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ गà¥à¤£à¥‹à¤‚ को आतà¥à¤®à¤¸à¤¾à¤¤ किया जा सके जो वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤—त विकास और सामाजिक सदà¥à¤­à¤¾à¤µ दोनों के लिठआवशà¥à¤¯à¤• थे। गà¥à¤°à¥à¤•à¥à¤²à¥‹à¤‚ की विरासत भारत में आधà¥à¤¨à¤¿à¤• शैकà¥à¤·à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤¥à¤¾à¤“ं को पà¥à¤°à¤­à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करती रही है, और समगà¥à¤° शिकà¥à¤·à¤¾, नैतिक मूलà¥à¤¯à¥‹à¤‚ और अधिक अचà¥à¤›à¥‡ के लिठजà¥à¤žà¤¾à¤¨ की खोज पर उनका जोर जà¥à¤žà¤¾à¤¨ का à¤à¤• कालातीत पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• बना हà¥à¤† है जो इतिहास के इतिहास में गूंजता है।

References

1. मुकर्जी, राधाकुमुद, एंश्येंट इण्डियन एजुकेशन, पृ० 137
2. महाभारत आदि पर्व, 215.103, अग्निपुराण 115.10
3. उत्तर राम चरित, 2.3
4. कौमुदी महोत्सव, पृ० ३
5. बाल रामायण, 2.3
6. कालिदास, रघुवंश, प्रथम सर्ग।
7. अनर्धराधव, 2.45
8. मुकर्जी, राधाकुमुद, पूर्वोक्त, पृ० 171.
9. वहीं, पृ० 333.
10. रामायण, 1.10.27 2.2.6
11. कौटिल्य, अर्थशास्त्र. 1.1.2

Published

2023-05-27