भारत की महिमा कवियों की वाणी - कालिदास के सन्दर्भ में

Authors

  • Usha Sharma Assistant Professor, S. S. Jain Subodh Mahila Shikshak Prashikshan Mahavidyalaya, Sanganer, Jaipur, India.

Keywords:

प्राचीन - पुराना विभूषित - सुशोभित न्योछावर - वारना अक्ष्क्षुण - स्थायी गरीयसी - श्रेष्ठ चोटियाँ - शिखर नदारद - गायब

Abstract

भारत à¤à¤• पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ भूमि है। इसकी महानता के बारे में जितना कहा जाठकम है। यहाठका शांत व समृदà¥à¤§ वातावरण मनà¥à¤·à¥à¤¯ को जीने का बेहतर मौका ही नहीं देता बलà¥à¤•ि उसे à¤à¤• सही सोच से भी समà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ करता है। भारत à¤à¤• समृदà¥à¤§ देश है जहाठसाहितà¥à¤¯, कला और विजà¥à¤žà¤¾à¤¨ के कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में महान लोगों ने जनà¥à¤® लिया है। यहाठकी संसà¥à¤•ृति विशà¥à¤µ की पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ संसà¥à¤•ृति है जिसका सभी अनà¥à¤¸à¤°à¤£ करते है। वैसे तो भारत में अनेक कवियों-मनीषियों ने अपनी लेखनी से साहितà¥à¤¯ को समृदà¥à¤§ किया है à¤à¤µà¤‚ भारत की महिमा का बखान किया है किनà¥à¤¤à¥ कालिदास जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ कवि कà¥à¤² गà¥à¤°à¥‚, दीपशिखा कालिदास, कविशिरोमणि, उपमा कालिदास आदि संजà¥à¤žà¤¾à¤“ं से विभूषित किया गया है। उनकी वाणी व साहितà¥à¤¯ रचना में भारत के गà¥à¤£à¤—ान का हम यहाठदरà¥à¤¶à¤¨ करेंगे।समाज की सà¥à¤µà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ होने पर ही वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ अपनी आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• उनà¥à¤¨à¤¤à¤¿ कर सकता है। इस पà¥à¤°à¤•ार समाज तथा वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ का परसà¥à¤ªà¤° अभà¥à¤¯à¥à¤¦à¤¯ भारतीय संसà¥à¤•ृति का चरम लकà¥à¤·à¥à¤¯ है। भारत ने अपनी संसà¥à¤•ृति व सभà¥à¤¯à¤¤à¤¾ को सदैव अकà¥à¤·à¥à¤•à¥à¤·à¥à¤£ रखा है। वह सदैव विशà¥à¤µ गà¥à¤°à¥‚ बन कर जगत को आदरà¥à¤¶à¥‹à¤‚ का पाठ पà¥à¤¾à¤¤à¤¾ आया है और आज भी विशà¥à¤µ यहाठकी संसà¥à¤•ृति का अनà¥à¤—म न करता है। लोगों को यह बताने से बेहतर बात और कà¥à¤¯à¤¾ होगी कि जो खà¥à¤µà¤¾à¤¬ वे देखते है वे सच हो सकते। यह कि उनके पास वह सब कà¥à¤› हो सकता है जो अचà¥à¤›à¥‡ जीवन के लिठजरूरी है - सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯, शिकà¥à¤·à¤¾ अपनी मंजिल तक पहà¥à¤à¤šà¤¨à¥‡ की आजादी और इन सबसे बà¥à¤•र शांति।

Published

2024-11-05