पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में स्काउट गाइड की भूमिका

Authors

  • राखी शर्मा प्राचार्या, अरावली शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, तम्बाकुपुरा, सीकर, राजस्थान, भारत

Keywords:

पर्यावरण, स्काउट गाइड, प्रकृति, संरक्षण

Abstract

बिना परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£ के मनà¥à¤·à¥à¤¯ जीवन के बारे में सोचना कलà¥à¤ªà¤¨à¤¾ मातà¥à¤° है। पृथà¥à¤µà¥€ पर वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£ पà¥à¤°à¤•ृति का सरà¥à¤µà¥‹Å¸à¤¾à¤® वरदान है। आदि काल से मानव को उसके परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£ के साथ जोड़ा जाता रहा है। शिकà¥à¤·à¤¾ तथा परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£ दोनांे में ही विकास को महतà¥à¤¤à¥à¤µ दिया जाता है। परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£ में वातावरण की गà¥à¤£à¤µà¤¤à¥à¤¤à¤¾ तथा शिकà¥à¤·à¤¾ में वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ की गà¥à¤£à¤µà¤¤à¥à¤¤à¤¾ को पà¥à¤°à¤¾à¤¥à¤®à¤¿à¤•ता दी जाती है। शिकà¥à¤·à¤¾ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ मनà¥à¤·à¥à¤¯ मंे परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£ की गà¥à¤£à¤µà¤¤à¥à¤¤à¤¾ के लिठपरिवरà¥à¤¤à¤¨ तथा सà¥à¤§à¤¾à¤° लाया जाता है। मानव व परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£ के मधà¥à¤¯ परसà¥à¤ªà¤° पूरकता का शाशà¥à¤µà¤¤ समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§ है, परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£à¥€à¤¯ शिकà¥à¤·à¤¾ मानव और परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£ के बीच के समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§à¥‹à¤‚ की वà¥à¤¯à¤¾à¤–à¥à¤¯à¤¾ करती है जिससे लोग अपने आस-पास के परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£ के महतà¥à¤¤à¥à¤µ को ठीक से समठसके तथा अपने परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£ को सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ व संरकà¥à¤·à¤¿à¤¤ रखने हेतॠपà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ हो सके। परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£ को सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ रखने के लिठराजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ राजà¥à¤¯ भारत सà¥à¤•ाउट à¤à¤µà¤‚ गाइड के राजà¥à¤¯ मà¥à¤–à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ इको कà¥à¤²à¤¬ की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ की गई है। सह शैकà¥à¤·à¤¿à¤• गतिविधियों के अनà¥à¤¤à¤°à¥à¤—त सà¥à¤•ाउटिंग/गाइडिंग कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤®à¥‹à¤‚ का अहमॠसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ है। इनके माधà¥à¤¯à¤® से छातà¥à¤°-छातà¥à¤°à¤¾à¤“ं में शà¥à¤°à¤®à¤¨à¤¿à¤·à¥à¤ à¤¾, कतà¥à¤°à¥à¤¤à¤µà¥à¤¯à¤¨à¤¿à¤·à¥à¤ à¤¾, सà¥à¤µà¤¾à¤µà¤²à¤®à¥à¤¬à¤¨ व नैतृतà¥à¤µ की भावना को विकसित किया जाता है । सà¥à¤•ाउटिंग-गाइडिंग की इसी पà¥à¤°à¤µà¥ƒà¤¤à¤¿ के अनà¥à¤¤à¤°à¥à¤—त सरà¥à¤µà¤¾à¤‚गीण विकास का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ किया जाता है। सà¥à¤•ाउट गाइड को परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£ मितà¥à¤° भी कहा गया है । यह पशà¥-पकà¥à¤·à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का मितà¥à¤° तथा पà¥à¤°à¤•ृति पà¥à¤°à¥‡à¤®à¥€ होता है। पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• राषà¥à¤Ÿà¥à¤° की आवषà¥à¤¯à¤•ताà¤à¤ यà¥à¤— सापेकà¥à¤· होती है। आज के परिपà¥à¤°à¥‡à¤•à¥à¤·à¥à¤¯ में देष को नैतिक सेवा, सौहारà¥à¤¦ ओैर रचनातà¥à¤®à¤• कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में आगे बढा़ने की आवषà¥à¤¯à¤•ता है और यह कारà¥à¤¯ सà¥à¤•ाउटिंग/गाइडिंग के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ समà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ हो सकता है। इसके माधà¥à¤¯à¤® से बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को नैतिक दृषà¥à¤Ÿà¤¿ में सà¥à¤¦à¥ƒà¤¢,़ कारà¥à¤¯ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¬à¤¦à¥à¤§, रचनातà¥à¤®à¤•ता के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ सनà¥à¤¨à¤¦à¥à¤§ तथा परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£ संरकà¥à¤·à¤£ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ समरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ होकर कारà¥à¤¯ करने हेतॠआगे बà¥à¤¾à¤¯à¤¾ जा सकता है।
अतः पà¥à¤°à¤•ृति के जैविक व अजैविक घटकों मे संतà¥à¤²à¤¨ व संरकà¥à¤·à¤£ बनाये रखना आज पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ का करà¥Å¸à¤¾à¤µà¥à¤¯ है। सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ à¤à¤µà¤‚ सà¥à¤µà¤šà¥à¤› परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£ न केवल जीवन बलà¥à¤•ि उसके विकास के लिये भी अतà¥à¤¯à¤‚त आवशà¥à¤¯à¤• है ।

DOI: https://doi.org/10.24321/2456.0510.202008

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Published

2020-12-30