विद्यालयों में बढती छात्र अनुशासनहीनता एक जटिल समस्या

Authors

  • योगिता नरूका शोधार्थी, कैरियर पांइट यूनिवर्सिटी, कोटा, राजस्थान, भारत http://orcid.org/0000-0003-4810-7483
  • मधु कुमार भारद्वाज प्राचार्य, हितकारी सहकारी वूमन टी0टी0 काॅलेज, कोटा, राजस्थान, भारत

Keywords:

अनुशासहीनता, प्रतीक, अट्टालिकाॅए, पतन, कुमार्गगायी, अभिशाप

Abstract

किसी राषà¥à¤Ÿà¥à¤° के भावी निरà¥à¤®à¤¾à¤¤à¤¾ उसके बचà¥à¤šà¥‡ और किशोर बनते है। यें राषà¥à¤Ÿà¥à¤° की आशा के पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• है। यें देश के भविषà¥à¤¯ का भवà¥à¤¯ भवन तभी बन पायेगे, जब इनकी नींव गहरी और सà¥à¤¦à¥ƒà¤¢ होगी। विशाल पà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤¦, गगन चà¥à¤‚बी, अटà¥à¤Ÿà¤¾à¤²à¤¿à¤•ाॅठतथा भवà¥à¤¯ भवन जितने मनमोहक तथा आकरà¥à¤·à¤• होते है, उतनी ही उनकी नींव गहरी होती है। रेत का महल गिर जाता है। मानव तभी भवà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤¦ के समान निरà¥à¤®à¤¿à¤¤ हो सकता है यदि विदà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥à¤¥à¥€ जीवन की नींव दृढ होगी। माली अपने कठोर परिशà¥à¤°à¤® से उपवन को सà¥à¤¨à¥à¤¦à¤° फूलों से सजाता है और मनà¥à¤·à¥à¤¯ सà¥à¤¨à¥à¤¦à¤° गà¥à¤£à¥‹ को अरà¥à¤œà¤¿à¤¤ कर जीवन को सà¥à¤–मय बनाता है। ये गà¥à¤£ विदà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥à¤¥à¥€ जीवन मंे ही पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ किये जा सकते है। छातà¥à¤° जीवन में अनà¥à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ बहà¥à¤¤ आवशà¥à¤¯à¤• है। अनà¥à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨à¤¯à¥à¤•à¥à¤¤ वातावरण बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के विकास के लिठनितांत आवशà¥à¤¯à¤• है। बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में अनà¥à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨à¤¹à¥€à¤¨à¤¤à¤¾ उनà¥à¤¹à¥‡ आलसी व कमजोर बना देती है। इससे उनका विकास धीरे होता है। कà¥à¤¯à¥‹à¤•ि अनà¥à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨à¤¹à¥€à¤¨à¤¤à¤¾ जीवन को पतन की ओर ले जाती है। अनà¥à¤¶à¤¾à¤¸à¤¹à¥€à¤¨ विदà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को शिकà¥à¤·à¤• कभी पà¥à¤¯à¤¾à¤° और सहयोग नही देते है। गà¥à¤°à¥‚ओं के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ अशà¥à¤°à¤¦à¥à¤µà¤¾ रखकर वह कà¥à¤®à¤¾à¤°à¥à¤—गायी बनते है, अतः उसका जीवन समाज के लिठबोठऔर अभिशाप बन जाता है। वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ यà¥à¤— में इस पà¥à¤°à¤•ार की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ देखी जा रही है। à¤à¤• बचà¥à¤šà¥‡ के लिये यह उचित नहीं है। अनà¥à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ में रहकर साधारण से साधारण बचà¥à¤šà¤¾ भी परिशà¥à¤°à¤®à¥€, बà¥à¤¦à¥à¤µà¤¿à¤®à¤¾à¤¨ और योगà¥à¤¯ बन सकता है। समय का मूलà¥à¤¯ भी उसे अनà¥à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ में रहकर समय पर अपने हर कारà¥à¤¯ को करना सीखाता है। जिससे अपने समय की कदà¥à¤° से वह जीवन में कभी परासà¥à¤¤ नहीं होता है। विदà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥à¤¥à¥€ जीवन कà¥à¤¯à¥‹à¤•ि भविषà¥à¤¯ निरà¥à¤®à¤¾à¤£ की आधार शिला होता है। अतः अनà¥à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ के माधà¥à¤¯à¤® से जीवन को वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¿à¤¤ कर विदà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को उजà¥à¤œà¤µà¤² भविषà¥à¤¯ की ओर बढाना चाहिà¤à¥¤ 

DOI: https://doi.org/10.24321/2456.0510.202006

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Published

2020-12-30