साहित्यिक कृतियों के सन्दर्भ में अनुवाद

Authors

  • चिलुका पुष्पलता हिंदी विभाग, माउंट कार्मल कॉलेज औटानोमोउस, बेंगलुरु, कर्नाटक, भारत| http://orcid.org/0000-0002-4006-0222

Keywords:

बौरान साहित्यि, न्यायाधीश हिंदी, प्रतिबिम्बित, दूरदर्शन

Abstract

भारत में अनà¥à¤µà¤¾à¤¦ की परमà¥à¤ªà¤°à¤¾ पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ काल से ही चली आ रही है। कहते हैं अनà¥à¤µà¤¾à¤¦ उतना ही पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ जितनी कि भाषा। आज ‘अनà¥à¤µà¤¾à¤¦â€™ शबà¥à¤¦ हमारे लिठकोई नया शबà¥à¤¦ नहीं है। विभिनà¥à¤¨ भाषायी मंच पर, साहितà¥à¤¯à¤¿à¤• पतà¥à¤°à¤¿à¤•ाओं में, अखबारों में तथा रोजमरà¥à¤°à¤¾ के जीवन में हमें अकà¥à¤¸à¤° ‘अनà¥à¤µà¤¾à¤¦â€™ शबà¥à¤¦ का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— देखने-सà¥à¤¨à¤¨à¥‡ को मिलता है। साधारणत: à¤à¤• भाषा-पाठ में निहित अरà¥à¤¥ या संदेश को दूसरे भाषा-पाठ में यथावतॠवà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ करना अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤à¥ à¤à¤• भाषा में कही गई बात को दूसरी भाषा में कहना अनà¥à¤µà¤¾à¤¦ है। परंतॠयहतज कारà¥à¤¯ उतना आसान नहीं, जितना कहने या सà¥à¤¨à¤¨à¥‡ में जान पड़ रहा है। दूसरा, अनà¥à¤µà¤¾à¤¦ सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚त की चरà¥à¤šà¤¾ करना और वà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¹à¤¾à¤°à¤¿à¤• अनà¥à¤µà¤¾à¤¦ करना-दो भिनà¥à¤¨ पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶à¥‹à¤‚ से गà¥à¤œà¤°à¤¨à¥‡ जैसा है, फिर भी इसमें कोई दो राय नहीं कि अनà¥à¤µà¤¾à¤¦ के सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚त हमें अनà¥à¤µà¤¾à¤¦ करà¥à¤® की जटिलताओं से परिचित कराते हैं। फिर, किसी भी भाषा के साहितà¥à¤¯ में और जà¥à¤žà¤¾à¤¨-विजà¥à¤žà¤¾à¤¨ के कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में जितना महतà¥à¤¤à¥à¤µ मूल लेखन का है, उससे कम महतà¥à¤¤à¥à¤µ अनà¥à¤µà¤¾à¤¦ का नहीं है। लेकिन सहज और संपà¥à¤°à¥‡à¤·à¤£à¥€à¤¯ अनà¥à¤µà¤¾à¤¦ मूल लेखन से भी कठिन काम है। भारत जैसे बहà¥à¤­à¤¾à¤·à¥€ देश के लिठअनà¥à¤µà¤¾à¤¦ की समसà¥à¤¯à¤¾ और भी महतà¥à¤¤à¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है। इसकी जटिलता को समà¤à¤¨à¤¾ अपने आप में बहà¥à¤¤ बड़ी समसà¥à¤¯à¤¾ है।

DOI: https://doi.org/10.24321/2456.0510.202009

References

1.अनुवाद विज्ञान की भूमिका – के.के गोस्वामी
2.अनुवाद विज्ञान :सिद्धान्त एवं प्रविधि – भोलानाथ तिवारी
3. अनुवाद विज्ञान और सेप्रेषण – डॉ. हरी मोहन

Published

2020-12-30