कुमाऊँ गढ़वाल में ब्रिटिश प्रशासन (1815-1857 ई0)

Authors

  • भारती बिष्ट इतिहास विभाग, हिन्दू कॉलेज, मुरादाबाद़, एम॰जे॰पी॰ रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय, बरेली, उत्तर प्रदेश http://orcid.org/0000-0002-5976-4676

Keywords:

रानीखेत, गोरखा, कुमाऊँ-गढ़वाल, मालगुजारी

Abstract

दारà¥à¤œà¤²à¤¿à¤‚ग से शिमला तक पहाड़ और कà¥à¤› भाग तराई का, नेपाल राजà¥à¤¯ में था। उधर दकà¥à¤·à¤¿à¤£ से बà¥à¤¤à¥‡ बà¥à¤¤à¥‡ अंगà¥à¤°à¥‡à¤œ भी हिमालय की जड़ में पहà¥à¤à¤š गये थे। हिमालय के ठणà¥à¤¡à¥‡ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ जो इंगà¥à¤²à¥ˆà¤£à¥à¤¡ की जलवायॠसदश थे तथा बहà¥à¤®à¥‚लà¥à¤¯ खनिज समà¥à¤ªà¤¦à¤¾ से भरपूर थे अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥‹à¤‚ के लोभ को और बड़ा रहे थे। अतः à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥‹à¤‚ को बहाना मातà¥à¤° चाहिठथा वे नेपाल से हिमांलय तक अधिक से अधिक भाग को छीन लेना चाहते थे। इस पर गरà¥à¤µà¤¨à¤° जनरल लारà¥à¤¡ हेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤‚गà¥à¤¸ ने अपà¥à¤°à¥ˆà¤² 1814 ई. में विवादासà¥à¤ªà¤¦ भूभाग पर अधिकार करने का हà¥à¤•à¥à¤® दिया और वह काम निरà¥à¤µà¤¿à¤°à¥‹à¤§ पूरा हो गया।’’ 1814 में गोरखों ने शिवराज पर अधिकार कर लिया तथा तीन थानों को जला दिया। अतः 1814 ई0 में गरà¥à¤µà¤¨à¤° जनरल लारà¥à¤¡ हैसà¥à¤Ÿà¤¿à¤‚गà¥à¤¸ ने गोरखों के विरà¥à¤¦à¥à¤§ यà¥à¤¦à¥à¤§ की घोषणा कर दी। चार अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥€ सेनाà¤à¤‚ चार भागों से नेपाल और कà¥à¤®à¤¾à¤Šà¤ पर अधिकार करने के लिठभेजी गयी। जनरल आकà¥à¤Ÿà¤°à¤²à¥‹à¤¨à¥€ की सेना के अतिरिकà¥à¤¤ सभी अंगà¥à¤°à¥‡à¤œ सेनापतियों को गोरखों की सेना से पराजित होना पड़ा। आकà¥à¤Ÿà¤°à¤²à¥‹à¤¨à¥€ ने गोरखा सेनापति अमर सिंह थापा को पराजित कर दिया। अनà¥à¤¤ में à¤à¤• सेना करà¥à¤¨à¤² गारà¥à¤¡à¤¨à¤° के नेततà¥à¤µ में रà¥à¤¦à¥à¤°à¤ªà¥à¤° भमौरी होते हà¥à¤ भीमताल की ओर से बाराखेड़ी के किले पर अधिकार के लिठभेजी गयी। गारà¥à¤¡à¤¨à¤° की सेना बिना किसी विरोध के 12 फरवरी को कनà¥à¤¯à¤¾à¤¸à¥€, 13 को चिलकिया और 14 को मसौत पहà¥à¤à¤š गयी। गोरखा सेना को कमपà¥à¤° (रानीखेत) से हटाने के लिठगारà¥à¤¡à¤¨à¤° 26 फरवरी से 22 मारà¥à¤š तक टकà¥à¤•र मारता रहा, चूंकि अब रà¥à¤¹à¥‡à¤²à¥‡ भी अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥‹à¤‚ की सहायता कर रहे थे। अलà¥à¤®à¥‹à¥œà¤¾ और कमपà¥à¤° (रानीखेत) के बीच सà¥à¤¯à¤¾à¤¹à¥€à¤¦à¥‡à¤µà¥€ à¤à¤• बड़े ही महतà¥à¤µ का सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ था, किनà¥à¤¤à¥ उसकी रकà¥à¤·à¤¾ का गोरखों ने कोई पà¥à¤°à¤¬à¤¨à¥à¤§ नहीं किया था। अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥‹à¤‚ ने उसे 23 मारà¥à¤š को ले लिया। अलà¥à¤®à¥‹à¥œà¤¾ के पास तक गोरखों के इस तरह बिना लड़े पीछे हटने से कà¥à¤®à¤¾à¤Šà¤à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ पर बà¥à¤°à¤¾ पà¥à¤°à¤­à¤¾à¤µ पड़ा। कपà¥à¤¤à¤¾à¤¨ हियरसी बनà¥à¤¦à¥€ बना लिया गया लेकिन गोरखों ने इस बड़ी विजय का जितना फायदा उठाना चाहिठथा, नहीं उठाया। 8 अपà¥à¤°à¥ˆà¤² (1815) को करà¥à¤¨à¤² निकलà¥à¤¸à¤¨ नयी सेना लेकर कटारमल पहà¥à¤‚चा, और उसने सारी सेना का संचालन अपने हाथों में ले लिया। उधर हसà¥à¤¤à¤¿à¤¦à¤² भी अलà¥à¤®à¥‹à¥œà¤¾ पहà¥à¤‚च गया। 23 अपà¥à¤°à¥ˆà¤² को गणानाथ के मनà¥à¤¦à¤¿à¤° के पास दोनों सेनाओं में यà¥à¤¦à¥à¤§ हà¥à¤†, जिसमें वीर हसà¥à¤¤à¤¿à¤¦à¤² मारा गया। फà¥à¤°à¥‡à¤œà¤° के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° ‘‘हसà¥à¤¤à¤¿à¤¦à¤² की मृतà¥à¤¯à¥ से शतà¥à¤°à¥ ने à¤à¤• अतà¥à¤¯à¤¨à¥à¤¤ महतà¥à¤µà¤¾à¤¶à¤¾à¤²à¥€, करà¥à¤®à¤  और साहसी अफसर को खो दिया। लाल मंडी किले का नाम ततà¥à¤•ालीन गरà¥à¤µà¤¨à¤° जनरल मोयरा के नाम से ‘‘फोरà¥à¤Ÿ मोयरा’’ रखा गया। 1815 ई0 में ‘‘सà¥à¤—ौली सनà¥à¤§à¤¿â€™â€™ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° गà¥à¤µà¤¾à¤² पर भी अधिकार हो गया। पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ शोध पतà¥à¤° में कà¥à¤®à¤¾à¤Šà¤-गà¥à¤µà¤¾à¤² में 1815 से कमà¥à¤ªà¤¨à¥€ शासन को रेखांकित करने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ किया गया है।
DOI: https://doi.org/10.24321/2456.0510.202012

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Published

2020-11-11