योसानों अकीको की कविता और मातृतà¥à¤µ का नारीवादी दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ोण
Keywords:
जापानी नारीवादी साहितà¥à¤¯, योसानों अकीको, साहितà¥à¤¯ में पà¥à¤°à¤¸à¤µ, मातृतà¥à¤µAbstract
योसानों अकीको (1878–1942) आधà¥à¤¨à¤¿à¤• जापानी साहितà¥à¤¯ की à¤à¤• पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ रचयिता थीं, जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ विशेष रूप से उनकी कविता के लिठजाना जाताहै। यदà¥à¤¯à¤ªà¤¿ उनकी गदà¥à¤¯ रचनाओं और राजनीतिक विचारों से यà¥à¤•à¥à¤¤ निबंधों में महिलाओं के अनà¥à¤à¤µà¥‹à¤‚ की गहन समठदिखाई देती है।यह लेखअकीको की कविता— दाइइचि नो जिनà¥à¤¤à¥à¤¸à¥‚ – (“पहली पà¥à¤°à¤¸à¤µ पीड़ा†1915)—में पà¥à¤°à¤¸à¤µ संबंधी विषय पर केंदà¥à¤°à¤¿à¤¤ है। अकीको ने पà¥à¤°à¤¸à¤µ को यà¥à¤¦à¥à¤§ यासारà¥à¤µà¤œà¤¨à¤¿à¤• जीवन में पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ किठगठबलिदान के समककà¥à¤· बताया, और इसके सामाजिक व राजनीतिक महतà¥à¤µ को रेखांकित किया। उनकेलेखन ने बीसवीं सदी की जापान में वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ उन वरà¥à¤œà¤¨à¤¾à¤“ं को चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¥€ दी।जहाठमहिलाओं के दरà¥à¤¦ और आतà¥à¤®-अà¤à¤¿à¤µà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को दबाया जाता था।अकीको ने पà¥à¤°à¤¸à¤µ के शारीरिक और à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• सतà¥à¤¯ को सà¥à¤µà¤° देकर महिलाओं की आवाज़ को साहितà¥à¤¯à¤¿à¤• और राजनीतिक विमरà¥à¤¶ में सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¤¦à¤¿à¤²à¤¾à¤¯à¤¾à¥¤ पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ कविता साहितà¥à¤¯ व समाज दोनों में महिलाओं की सकà¥à¤°à¤¿à¤¯ à¤à¥‚मिका को सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ करती है।
References
2. ओता, नोबोरà¥. निहोन किंदई तांका-शी नो कोचिकà¥: अकीको, ताकà¥à¤¬à¥‹à¤•à¥, याइचि, शिगेयोशी और सामियो [आधà¥à¤¨à¤¿à¤• जापानी तांका कविता का निरà¥à¤®à¤¾à¤£: अकीको, ताकà¥à¤¬à¥‹à¤•à¥, याइचि, शिगेयोशी और सामियो]. टोकà¥à¤¯à¥‹: यागिशोतन, 2006.