शà¥à¤°à¥€à¤°à¤¾à¤®à¤šà¤°à¤¿à¤¤à¤®à¤¾à¤¨à¤¸ में वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ लोकमंगल की à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾
Keywords:
लोक मंगल, जगत कलà¥à¤¯à¤¾à¤£, समतà¥à¤µ, सदà¥à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾, अपनतà¥à¤µ, आदरà¥à¤¶ समाज।Abstract
जड़ चेतन जग जीव जत, सकल राममय जानि।
बंदउठसबके पद कमल, सदा जोरि जà¥à¤— पानि ।।1 (बालकाणà¥à¤¡/ दोहा 7 ग)
देव, दनà¥à¤œ, नर, नाग, खग, पà¥à¤°à¥‡à¤¤, पितर, गंधरà¥à¤µà¥¤
बंदउठकिनà¥à¤¨à¤° रजनिचर, कृपा करहà¤à¥ अब सरà¥à¤µà¥¤à¥¤2 (बालकाणà¥à¤¡/ दोहा 7 घ)
आकर चारि लाख चौरासी। जाति जीव जल थल नठवास4ी।
सीय राममय सब जग जानी। करउठपà¥à¤°à¤£à¤¾à¤® जोरि जà¥à¤— पानी।।3 (बालकाणà¥à¤¡/ दोहा 8/ चौपाई1,2)
राम चरित मानस तà¥à¤²à¤¸à¥€ साहितà¥à¤¯ का महाकावà¥à¤¯ है। इसे कलियà¥à¤—ीन सामवेद à¤à¥€ कहा जाता है। गोसà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ तà¥à¤²à¤¸à¥€à¤¦à¤¾à¤¸ जी ने मानस में लोकमंगल की कामना को सरà¥à¤µà¥‹à¤ªà¤°à¤¿ रखा। लोकमंगल अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤ जन सामानà¥à¤¯ से जन विशेष तक। मंगल का अà¤à¤¿à¤ªà¥à¤°à¤¾à¤¯ है शà¥à¤ हित चिंतन। तà¥à¤²à¤¸à¥€à¤¦à¤¾à¤¸ जी कहते हैं कि इस पà¥à¤°à¤•ृति की संरचना में जड़-चेतन, सà¥à¤¥à¤¾à¤µà¤°-जंगम सà¤à¥€ का कलà¥à¤¯à¤¾à¤£ हो कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि सà¤à¥€ में परमातà¥à¤®à¤¾ का अंश है। इसीलिठतà¥à¤²à¤¸à¥€à¤¦à¤¾à¤¸ जी चेतन की सà¤à¥€ योनियों, देव, दानव, मनà¥à¤·à¥à¤¯, सरà¥à¤ª, पकà¥à¤·à¥€, पà¥à¤°à¥‡à¤¤, पितर, गंधरà¥à¤µ, किनà¥à¤¨à¤° à¤à¤µà¤‚ राकà¥à¤·à¤¸ सà¤à¥€ से पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¨à¤¾ करते हैं कि उनकी इस मंगल-कामना में सà¤à¥€ उनकी सहायता करें। वे इस सृषà¥à¤Ÿà¤¿ के जल-थल à¤à¤µà¤‚ गगनचारी चार लाख चौरासी योनियों में समाहित पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का कलà¥à¤¯à¤¾à¤£ चाहते हैं। गोसà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ जी की समतà¥à¤µ दृषà¥à¤Ÿà¤¿ में सà¤à¥€ उनके ईषà¥à¤Ÿ के पà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥‡ हैं उन सà¤à¥€ की वे वनà¥à¤¦à¤¨à¤¾ करते हैं।