शिक्षक शिक्षा: अवसर, चुनौतियाँ और समाधान
Abstract
भारत में शिक्षक शिक्षा एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है, क्योंकि शिक्षक ही शिक्षा प्रणाली की नींव हैं। स्वतंत्रता से पूर्व और पश्चात् कई शिक्षा आयोगों एवं समितियों ने शिक्षक प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुधारने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए। हंटर आयोग, राधाकृष्णन आयोग, कोठारी आयोग आदि ने स्पष्ट रूप से बताया कि जब तक शिक्षक प्रशिक्षित, योग्य और नैतिक मूल्यों से युक्त नहीं होंगे, तब तक शिक्षा प्रणाली में अपेक्षित सुधार संभव नहीं है।
आज भी देश में अनेक शिक्षक-प्रशिक्षण संस्थान कार्यरत हैं, परंतु संसाधनों की कमी, गुणवत्ता का अभाव तथा शिक्षण को मात्र व्यवसाय समझने की मानसिकता के कारण शिक्षकों का स्तर गिरता जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया बाधित होती है और विद्यार्थी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित रह जाते हैं।
इसलिए आज आवश्यकता है कि शिक्षक शिक्षा को व्यावहारिक, मूल्यनिष्ठ एवं समर्पित रूप में विकसित किया जाए। केवल प्रशिक्षित ही नहीं, बल्कि प्रेरणादायी और आदर्श शिक्षक ही राष्ट्र निर्माण में प्रभावी योगदान दे सकते हैं। एक मजबूत शिक्षक-शिक्षा प्रणाली ही समृद्ध और सशक्त भारत की आधारशिला बन सकती है।