मुन्शी प्रेमचंद की कहानियों में नारी विषयक अवधारणा का विश्लेषण

Authors

  • Chaman Singh Thakur Ph.D. Education M.A. Hindi M.A. Pol. Science M.A. Yoga M.ED. PGDHE

Keywords:

दीप्ति खण्डेलवाल, नारी स्वर, स्त्री विमर्श , आत्मचेतना, सामाजिक शोषण , विद्रोह, अस्मिता , समकालीन हिंदी कहानी , स्त्री अनुभव , स्वतंत्रता

Abstract

मुंशी प्रेमचंद हिंदी साहित्य के युगप्रवर्तक कथाकार हैं, जिनकी रचनाओं में सामाजिक यथार्थ का गहन चित्रण मिलता है। उनकी कहानियों में नारी विषयक दृष्टिकोण अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रेमचंद ने नारी को केवल दया की पात्र न मानकर, उसे एक संघर्षशील, आत्मनिर्भर और आत्मसम्मान से युक्त मानव रूप में चित्रित किया है। उन्होंने समाज में स्त्रियों की स्थिति, उनके अधिकारों, उनकी भावनाओं और उनके शोषण को बहुत ही संवेदनशीलता से प्रस्तुत किया है। उनकी कहानियों की स्त्रियाँ कभी त्याग और बलिदान की मूर्ति हैं तो कभी विद्रोह और आत्मसम्मान की प्रतीक। "सेवासदन", "प्रेमाश्रम", "निर्मला", और "कफन" जैसी रचनाओं में नारी पात्रों के माध्यम से उन्होंने सामाजिक कुरीतियों, पितृसत्तात्मक व्यवस्था और स्त्री-शोषण पर करारा प्रहार किया है। यह शोधपत्र प्रेमचंद की कहानियों में चित्रित नारी विषयक अवधारणा का आलोचनात्मक विश्लेषण करता है और यह दर्शाता है कि वे अपने समय में स्त्री विमर्श के एक सशक्त प्रवक्ता थे।

References

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Published

2025-12-02

How to Cite

Thakur, C. S. . (2025). मुन्शी प्रेमचंद की कहानियों में नारी विषयक अवधारणा का विश्लेषण. Anusanadhan: A Multidisciplinary International Journal (In Hindi), 10(3&4), 14-17. Retrieved from https://thejournalshouse.com/index.php/Anusandhan-Hindi-IntlJournal/article/view/1954