भारतीय ज्ञान परंपरा: स्मृति, अभ्यास और परंपरा के आलोक में एक जीवित ज्ञान प्रणाली का दार्शनिक अनुशीलन
Keywords:
भारतीय ज्ञान परंपरा, स्मृति, अभ्यास, परंपरा, जीवित ज्ञान प्रणाली, उपनिषद, भगवद्गीता, चेतना, समकालीन प्रासंगिकताAbstract
प्रस्तुत शोधपत्र का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा को एक ऐतिहासिक अथवा ग्रंथपरक संरचना के रूप में नहीं, बल्कि एक जीवित, गतिशील और अनुभवसिद्ध ज्ञान प्रणाली के रूप में प्रतिष्ठित करना है। अध्ययन में यह प्रतिपादित किया गया है कि भारतीय ज्ञान परंपरा की विशिष्टता उसके त्रिसूत्रात्मक स्वरूप—स्मृति , अभ्यास और परंपरा—में निहित है। स्मृति ज्ञान का संरक्षण करती है, अभ्यास उसे जीवन में उतारता है और परंपरा उसे कालातीत प्रवाह प्रदान करती है। उपनिषद, भगवद्गीता, योग-परंपरा तथा शास्त्रीय दार्शनिक ग्रंथों के आलोक में यह शोध स्पष्ट करता है कि भारतीय दृष्टि में ज्ञान का लक्ष्य केवल बौद्धिक बोध नहीं, बल्कि चेतना का रूपांतरण, नैतिक उत्कर्ष और सामाजिक संतुलन है। समकालीन शिक्षा, तकनीक, मानसिक संकट और वैश्विक विमर्श के संदर्भ में भारतीय ज्ञान परंपरा की प्रासंगिकता को भी रेखांकित किया गया है। निष्कर्षतः यह अध्ययन भारतीय ज्ञान परंपरा को एक ऐसी समन्वयात्मक और मानवीय ज्ञान-व्यवस्था के रूप में प्रस्तुत करता है, जो वर्तमान और भविष्य—दोनों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो सकती है।
How to cite this article:
ख़ालिद हसन अब्बासी, भारतीय ज्ञान परंपरा: स्मृति, अभ्यास और परंपरा के आलोक में एक जीवित ज्ञान प्रणाली का दार्शनिक अनुशीलन, Anu: a, Mul, Int, Jour, Vol 11, 2026 (Special Issue): Pg. No. 1-12.
DOI:https://doi.org/10.24321/2456.0510.202603
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