भारतीय मनीषा में चेतना के स्वरूप का एक समीक्षात्मक अध्ययन
Keywords:
चेतना, उपनिषद्, अद्वैतवाद, मीमांसा दर्शन, बौद्ध दर्शन, जैन दर्शनAbstract
यदि हम भारतीय दर्शन की सूक्ष्म विवेचना करते हैं तो हमें ज्ञात होता है कि समस्त भारतीय ज्ञान दर्शन स्व के अन्वेषण और सत्य की खोज पर केन्द्रित है और अन्वेषण की यह यात्रा चेतना के इर्द गिर्द घूमती है। जहाँ एक ओर पाश्चात्य दर्शन चेतना तत्व को केवल मस्तिष्क का एक अवयव मानता है] वहीं दूसरी ओर भारतीय मनस्वियों ने चेतना की ब्राह्मण्ड के आदि तत्व और अटल सत्य के रूप में विवेचना की है। ऋग्वैदिक मनीषियों से लेकर वेदांत के दार्शनिकों तक] तथागत बुद्ध से लेकर अद्वैतवादी शंकराचार्य तक प्रत्येक ने अपने-अपने ज्ञान के आधार पर चेतना के मौलिक स्वरूप को जानने का प्रयत्न किया है। वेदांत दर्शन में चेतना को प्रज्ञान ब्रह् कहा गया है। जिसका तात्पर्य है कि इंसानरूपी चेतना ही ब्रह्म है। सांख्य दर्शन चेतना को प्रकृति से अलग पुरूष चेतन रूप में स्वीकार करता है जबकि अद्वैतवादी दर्शन चेतना के सत्] चित् एवं आनंद के समग्र रूप में सच्चिदानंद के रूप में स्वीकार करता है। प्रस्तुत शोध पत्र में हम चेतना स्वरूप को जानने हेतु भारतीय ज्ञान दर्शन की विभिन्न शाखाओं जैसे उपनिषद्] सांख्य] योग और बौद्ध दर्शन में चेतना से जुड़े विभिन्न आयामों मौलिक गुण धर्म तथा उसके व्यापक स्वरूप का विश्लेषण करेंगे।
How to cite this article:
दीपक कुमार, विकास कुमार, भारतीय मनीषा में चेतना के स्वरूप का एक समीक्षात्मक अध्ययन, Anu: a, Mul, Int, Jour, Vol 11, 2026 (Special Issue): Pg. No. 13-16.
DOI: https://doi.org/10.24321/2456.0510.202606
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