भारतीय मनीषा में चेतना के स्वरूप का एक समीक्षात्मक अध्ययन

Authors

  • दीपक कुमार असिस्टेंट प्रोफेसर, इतिहास विभाग, एस॰एस॰वी॰ कालेज, हापुड़, उत्तर प्रदेश, भारत
  • विकास कुमार शोध छात्र, इतिहास विभाग, चौ॰ चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ, उत्तर प्रदेश, भारत

Keywords:

चेतना, उपनिषद्, अद्वैतवाद, मीमांसा दर्शन, बौद्ध दर्शन, जैन दर्शन

Abstract

यदि हम भारतीय दर्शन की सूक्ष्म विवेचना करते हैं तो हमें ज्ञात होता है कि समस्त भारतीय ज्ञान दर्शन स्व के अन्वेषण और सत्य की खोज पर केन्द्रित है और अन्वेषण की यह यात्रा चेतना के इर्द गिर्द घूमती है। जहाँ एक ओर पाश्चात्य दर्शन चेतना तत्व को केवल मस्तिष्क का एक अवयव मानता है] वहीं दूसरी ओर भारतीय मनस्वियों ने चेतना की ब्राह्मण्ड के आदि तत्व और अटल सत्य के रूप में विवेचना की है। ऋग्वैदिक मनीषियों से लेकर वेदांत के दार्शनिकों तक] तथागत बुद्ध से लेकर अद्वैतवादी शंकराचार्य तक प्रत्येक ने अपने-अपने ज्ञान के आधार पर चेतना के मौलिक स्वरूप को जानने का प्रयत्न किया है। वेदांत दर्शन में चेतना को प्रज्ञान ब्रह् कहा गया है। जिसका तात्पर्य है कि इंसानरूपी चेतना ही ब्रह्म है। सांख्य दर्शन चेतना को प्रकृति से अलग पुरूष चेतन रूप में स्वीकार करता है जबकि अद्वैतवादी दर्शन चेतना के सत्] चित् एवं आनंद के समग्र रूप में सच्चिदानंद के रूप में स्वीकार करता है। प्रस्तुत शोध पत्र में हम चेतना स्वरूप को जानने हेतु भारतीय ज्ञान दर्शन की विभिन्न शाखाओं जैसे उपनिषद्] सांख्य] योग और बौद्ध दर्शन में चेतना से जुड़े विभिन्न आयामों मौलिक गुण धर्म तथा उसके व्यापक स्वरूप का विश्लेषण करेंगे।

How to cite this article:

दीपक कुमार, विकास कुमार, भारतीय मनीषा में चेतना के स्वरूप का एक समीक्षात्मक अध्ययन, Anu: a, Mul, Int, Jour, Vol 11, 2026 (Special Issue): Pg. No. 13-16.

DOI: https://doi.org/10.24321/2456.0510.202606

References

दास गुप्ता, एस॰एन॰ 2012 ए हिस्ट्री आफ इंडियन फिलोस्फी वाल्यूम] 1 मोतीलाल बनारसीदास] दिल्ली] पृ॰ 45।

माधवाचार्य] 1997 सर्वदर्शन संग्रह ऋषि उमाशंकर शर्मा] हिन्दी अनुवाद चौखम्बा विद्याभवन] वाराणसी] पृ॰ 05।

शर्मा, चन्द्रधर, 1995: भारतीय दर्शन: आलोचन और अनुशीलन, मोतीलाल बनारसीदास, दिल्ली, पृ॰ 27।

माधवाचार्य, 1997: सर्वदर्शन संग्रह (ऋषि उमाशंकर शर्मा, हिन्दी अनुवाद), चौखम्बा विद्याभवन, वाराणसी, पृ॰ 80।

बिजल्वाण, चक्रधर, 1983: भारतीय न्यायशास्त्र, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ, पृ॰ 110।

माधवाचार्य, 1997: सर्वदर्शन संग्रह (ऋषि उमाशंकर शर्मा, हिन्दी अनुवाद), चौखम्बा विद्याभवन, वाराणसी, पृ॰ 395।

देवराज, नंदकिशोर, 2002: भारतीय दर्शन, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ, पृ॰ 110।

इंडिच, विलियम एम॰, 2000: कान्सियसन्स इन अद्वैत वेदांत, मोतीलाल बनारसीदास, दिल्ली पृ॰ 31।

Published

2026-03-16

How to Cite

कुमार द. ., & कुमार व. (2026). भारतीय मनीषा में चेतना के स्वरूप का एक समीक्षात्मक अध्ययन. Anusanadhan: A Multidisciplinary International Journal (In Hindi), 11(Special (Issue), 13-16. Retrieved from https://thejournalshouse.com/index.php/Anusandhan-Hindi-IntlJournal/article/view/1982