अध्ययन एक तुलनात्मक अध्ययन: राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों में मूल्यों का तुलनात्मक अध्ययन
Keywords:
अभिवृत्ति, प्रवृत्ति, अस्तित्व, सामाजिक, संवेगात्मक, समष्टि, आत्मीयता, अवधारणा, समायोजन, मूल्य, समृद्धिAbstract
मूल्य हमारी स्वयं की अभिवृत्ति का वह कार्य है जिसकी उपयोगिता एक व्यक्ति, समाज, राष्ट्र अथवा सम्पूर्ण विश्व के लिए उपयोगी एवं महत्वपूर्ण है। साथ ही यह आस्तिकतामय तथा निर्धारित प्रवृत्तियाँ भी हैं। मूल्य संबंधों को संतुलित करके व्यवहार में एकरूपता एवं आत्मीयता स्थापित करते हैं। मूल्य की कल्पना मानव अस्तित्व को पूर्ण रूप से स्वीकार किए बिना संभव नहीं है। मूल्य की अपनी एक प्राकृतिक व्यवस्था होती है। मूल्य स्वयं एक व्यवस्था है जो मानव जीवन को संस्कारित करती है।
मूल्य विकास के क्रम में मानव सबसे पहले इन्द्रिय विषय बोध अर्थात् सुख एवं आनंद को मूल्यांकन का आधार बनाता है। तत्पश्चात सुख के साथ ही मूल्यांकन में सुरक्षा का भाव भी समाहित हो जाता है और अंत में अपने सुख, सुरक्षा एवं हित के साथ-साथ समाज के हित एवं सुरक्षा का भाव भी मानव में उत्पन्न होता है तथा इसी दृष्टिकोण से वह मूल्यों का निर्धारण करता है। मानव में समष्टि हित का यही भाव उसमें निहित उच्चतम मूल्यों का द्योतक है। उच्चतम मूल्यों से युक्त होने पर व्यक्ति अपने जीवन का लक्ष्य मात्र अपने सुख एवं समृद्धि तक सीमित न रखकर समाज के सुख, समृद्धि एवं सुरक्षा तक विस्तृत कर देता है। अतः किसी भी व्यक्ति के जीवन में संतुष्टि के लिए सुख, समृद्धि एवं सुरक्षा महत्वपूर्ण कारक होते हैं, जिन्हें मूल्य प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करते हैं।
How to cite this article:
उषा शर्मा, केंद्रीय माध्यमिक विद्यालय तथा राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों में मूल्यों का तुलनात्मक अध्ययन Anu: a, Mul, Int, Jour, 2026; 11(3&4): 9-14.
DOI: https://doi.org/10.24321/2456.0510.202616
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