साहितà¥à¤¯à¤¿à¤• कृतियों के सनà¥à¤¦à¤°à¥à¤ में अनà¥à¤µà¤¾à¤¦
Keywords:
बौरान साहितà¥à¤¯à¤¿, नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤§à¥€à¤¶ हिंदी, पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¬à¤¿à¤®à¥à¤¬à¤¿à¤¤, दूरदरà¥à¤¶à¤¨Abstract
à¤à¤¾à¤°à¤¤ में अनà¥à¤µà¤¾à¤¦ की परमà¥à¤ªà¤°à¤¾ पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ काल से ही चली आ रही है। कहते हैं अनà¥à¤µà¤¾à¤¦ उतना ही पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ जितनी कि à¤à¤¾à¤·à¤¾à¥¤ आज ‘अनà¥à¤µà¤¾à¤¦â€™ शबà¥à¤¦ हमारे लिठकोई नया शबà¥à¤¦ नहीं है। विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ à¤à¤¾à¤·à¤¾à¤¯à¥€ मंच पर, साहितà¥à¤¯à¤¿à¤• पतà¥à¤°à¤¿à¤•ाओं में, अखबारों में तथा रोजमरà¥à¤°à¤¾ के जीवन में हमें अकà¥à¤¸à¤° ‘अनà¥à¤µà¤¾à¤¦â€™ शबà¥à¤¦ का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— देखने-सà¥à¤¨à¤¨à¥‡ को मिलता है। साधारणत: à¤à¤• à¤à¤¾à¤·à¤¾-पाठमें निहित अरà¥à¤¥ या संदेश को दूसरे à¤à¤¾à¤·à¤¾-पाठमें यथावतॠवà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ करना अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤à¥ à¤à¤• à¤à¤¾à¤·à¤¾ में कही गई बात को दूसरी à¤à¤¾à¤·à¤¾ में कहना अनà¥à¤µà¤¾à¤¦ है। परंतॠयहतज कारà¥à¤¯ उतना आसान नहीं, जितना कहने या सà¥à¤¨à¤¨à¥‡ में जान पड़ रहा है। दूसरा, अनà¥à¤µà¤¾à¤¦ सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚त की चरà¥à¤šà¤¾ करना और वà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¹à¤¾à¤°à¤¿à¤• अनà¥à¤µà¤¾à¤¦ करना-दो à¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶à¥‹à¤‚ से गà¥à¤œà¤°à¤¨à¥‡ जैसा है, फिर à¤à¥€ इसमें कोई दो राय नहीं कि अनà¥à¤µà¤¾à¤¦ के सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚त हमें अनà¥à¤µà¤¾à¤¦ करà¥à¤® की जटिलताओं से परिचित कराते हैं। फिर, किसी à¤à¥€ à¤à¤¾à¤·à¤¾ के साहितà¥à¤¯ में और जà¥à¤žà¤¾à¤¨-विजà¥à¤žà¤¾à¤¨ के कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में जितना महतà¥à¤¤à¥à¤µ मूल लेखन का है, उससे कम महतà¥à¤¤à¥à¤µ अनà¥à¤µà¤¾à¤¦ का नहीं है। लेकिन सहज और संपà¥à¤°à¥‡à¤·à¤£à¥€à¤¯ अनà¥à¤µà¤¾à¤¦ मूल लेखन से à¤à¥€ कठिन काम है। à¤à¤¾à¤°à¤¤ जैसे बहà¥à¤à¤¾à¤·à¥€ देश के लिठअनà¥à¤µà¤¾à¤¦ की समसà¥à¤¯à¤¾ और à¤à¥€ महतà¥à¤¤à¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है। इसकी जटिलता को समà¤à¤¨à¤¾ अपने आप में बहà¥à¤¤ बड़ी समसà¥à¤¯à¤¾ है।
DOI: https://doi.org/10.24321/2456.0510.202009
References
2.अनà¥à¤µà¤¾à¤¦ विजà¥à¤žà¤¾à¤¨ :सिदà¥à¤§à¤¾à¤¨à¥à¤¤ à¤à¤µà¤‚ पà¥à¤°à¤µà¤¿à¤§à¤¿ – à¤à¥‹à¤²à¤¾à¤¨à¤¾à¤¥ तिवारी
3. अनà¥à¤µà¤¾à¤¦ विजà¥à¤žà¤¾à¤¨ और सेपà¥à¤°à¥‡à¤·à¤£ – डॉ. हरी मोहन