दीप्ति खण्डेलवाल की कहानियों में नारी स्वर का विश्लेषण
Keywords:
दीप्ति खण्डेलवाल, नारी स्वर, स्त्री विमर्श , आत्मचेतना, सामाजिक शोषण , विद्रोह, अस्मिता , समकालीन हिंदी कहानी , स्त्री अनुभव , स्वतंत्रताAbstract
दीप्ति खण्डेलवाल समकालीन हिंदी कथा साहित्य की एक सशक्त महिला कथाकार हैं, जिन्होंने अपनी कहानियों में नारी जीवन के विविध पहलुओं को अत्यंत सजीव और संवेदनशील रूप से प्रस्तुत किया है। उनकी कहानियों में नारी मात्र सहानुभूति की पात्र नहीं है, बल्कि वह अपनी अस्मिता, स्वतंत्रता और अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाली सशक्त इकाई के रूप में सामने आती है। दीप्ति की स्त्री पात्र घरेलू, सामाजिक और मानसिक शोषण के खिलाफ आवाज़ उठाती हैं और अपने निर्णयों के लिए स्वयं जिम्मेदार बनती हैं। इस शोध में दीप्ति खण्डेलवाल की कहानियों का विश्लेषण नारी दृष्टिकोण के संदर्भ में किया गया है, जिसमें उनकी रचनाओं में स्त्री की आत्मचेतना, विद्रोही स्वर, भावनात्मक द्वंद्व और सामाजिक असमानताओं से टकराव की प्रवृत्तियों को उजागर किया गया है। यह विश्लेषण इस बात को रेखांकित करता है कि दीप्ति खण्डेलवाल की कहानियाँ समकालीन स्त्री विमर्श को एक नई दिशा प्रदान करती हैं।
References
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