नालंदा की नई शक्ति: शिक्षित महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता और कुपोषण नियंत्रण में उनकी भूमिका

Authors

  • मनोज कुमार सहायक प्रोफेसर, जे.पी.एस.पी.एम., नालंदा, बिहार, भारत

Keywords:

क्रिएटिव इकोनॉमी, पैसिव इकोनॉमी, सृजनात्मकता, नवाचार, तकनीकी दक्षता, बाल कुपोषण, महिला आर्थिक सशक्तिकरण।

Abstract

यह लेख बिहार के नालंदा जिले के विशेष संदर्भ में शिक्षित महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता और बाल कुपोषण के बीच के गहन अंतर्संबंधों का विस्तृत विश्लेषण करता है। अध्ययन का मुख्य तर्क यह है कि लेखिका शिक्षा केवल साक्षरता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन्हें आर्थिक निर्णय लेने की वास्तविक शक्ति प्रदान करती है, जो सीधे तौर पर परिवार के पोषण स्तर को प्रभावित करती है। जब महिलाएँ शिक्षित और आर्थिक रूप से स्वतंत्र होती हैं, तो वे घरेलू आय का एक बड़ा हिस्सा स्वास्थ्यप्रद भोजन और चिकित्सा देखभाल पर खर्च करती हैं। नालंदा जैसे कृषि प्रधान क्षेत्र में, जहाँ कुपोषण एक गंभीर चुनौती है, शिक्षित महिलाओं की वित्तीय स्वायत्तता पोषण संबंधी असुरक्षा को कम करने में एक 'गेम-चेंजर' साबित हो रही है। यह लेख विभिन्न सामाजिक-आर्थिक संकेतकों के माध्यम से यह दर्शाता है कि कैसे महिलाओं के पास धन का नियंत्रण होने से बच्चों के आहार में विविधता और गुणवत्ता सुनिश्चित होती है। लेख यह भी रेखांकित करता है कि आर्थिक रूप से सुदृढ़ माताएँ स्वास्थ्य और स्वच्छता (WASH) संकेतकों पर बेहतर निवेश करती हैं, जो बच्चों को संक्रमण चक्र से बचाता है। निष्कर्षतः, लेख यह प्रस्तावित करता है कि कुपोषण उन्मूलन के लिए महिलाओं का शैक्षणिक और आर्थिक सशक्तिकरण एक अनिवार्य पूर्व शर्त है। सरकारी नीतियों को केवल खाद्यान्न वितरण तक सीमित न रहकर महिलाओं के व्यावसायिक प्रशिक्षण और वित्तीय समावेशन पर केंद्रित होना चाहिए ताकि कुपोषण के चक्र को जड़ से समाप्त किया जा सके। यह लेख नालंदा के जमीनी अनुभवों के आधार पर महिला एजेंसी और सार्वजनिक स्वास्थ्य के बीच एक नया विमर्श प्रस्तुत करता है। भारतीय अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन के 'क्षमता दृष्टिकोण' (Capability Approach) के अनुरूप, यह लेख स्पष्ट करता है कि महिलाओं की 'एजेंसी' ही बाल कुपोषण के विरुद्ध सबसे प्रभावी ढाल है। अंततः, महिला की आर्थिक स्वतंत्रता ही वह प्राथमिक माध्यम है जो बाल विकास और समाज के समग्र पोषण मानकों को उन्नत करती है।

How to cite this article:

नालंदा की नई शक्ति: शिक्षित महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता और कुपोषण नियंत्रण में उनकी भूमिका, Anu: a, Mul, Int, Jour, 2026; 11(3&4): 15-25.

DOI: https://doi.org/10.24321/2456.0510.202618

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Published

2026-06-05

How to Cite

कुमार म. . (2026). नालंदा की नई शक्ति: शिक्षित महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता और कुपोषण नियंत्रण में उनकी भूमिका. Anusanadhan: A Multidisciplinary International Journal (In Hindi), 11(3&4), 15-25. Retrieved from https://thejournalshouse.com/index.php/Anusandhan-Hindi-IntlJournal/article/view/2208