18वीं शताब्दी में सहारनपुर और आस-पास के क्षेत्रों में सत्ता-संघर्ष: एक ऐतिहासिक अध्ययन
Keywords:
बंदा बहादुर, सिक्ख आक्रमण, नजीबउद्दौला, जाबिता खां, गंगा-यमुना दोआब।Abstract
यह शोध पत्र उत्तर मुगलकालीन भारत में सहारनपुर जिले की 1707 से 1803 तक की स्थिति का ऐतिहासिक अध्ययन प्रस्तुत करता है। औरंगजेब की मृत्यु के बाद केन्द्रीय शक्ति का विघटन और क्षेत्रीय शक्तियों का उदय होने लगा। योग्य उत्तराधिकारियों के अभाव व उत्तराधिकार के युद्धों ने दिल्ली के आस.पास के क्षेत्रों में एक खालीपन की स्थिति उत्पन्न कर दी। इसका सीधा प्रभाव सहारनपुर और आस पास के क्षेत्रों पर पड़ना लाजिमी था। दिल्ली की कमजोर पकड़ के चलते क्षेत्रीय जागीरदार ए नवाब मराठें अपना-अपना स्वतंत्र राज्य स्थापित करने की कोशिश में जुटे थे। नादिर शाह, अब्दाली जैसे आक्रमणकारियों के हमले भी शुरु हो रहे थे। मराठे उत्तर भारत में जोरदार दस्तक दे रहे थे उनके आक्रमणों ने सहारनपुर के आस-पास के क्षेत्रों की स्थिति को और विकट बना दिया साथ ही साथ इसी कालखंड में सिक्खों के भी गंगा यमुना दोआब में लगातार आक्रमण हो रहे थे। यह शोधपत्र 18वीं शताब्दी में सहारनपुर और उसके आस पास के क्षेत्रों में सत्ता-संघर्ष, सैन्य क्रियाकलापों का विश्लेषण करता है। यह शोध पत्र सहारनपुर की तत्कालीन मुगल साम्राज्य की केन्द्रीय राजनीति में जो भूमिका रही है उस पर समग्र दृष्टिकोण प्रदान करता है।
How to cite this article:
दीपक कुमार, विकास कुमार, 18वीं शताब्दी में सहारनपुर और आस-पास के क्षेत्रों में सत्ता संघर्ष: एक ऐतिहासिक अध्ययन, Anu: a, Mul, Int, Jour, 2026; 11(3&4): 51-60.