भारतीय ज्ञान परंपरा की समकालीन प्रासंगिकता

Authors

  • शाश्वत चन्देल

Keywords:

भारतीय ज्ञान परंपरा, समकालीन प्रासंगिकता, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, सतत विकास, आयुर्वेद और योग, वसुधैव कुटुम्बकम्, समग्र दृष्टिकोण।

Abstract

भारतीय ज्ञान परंपरा विश्व की प्राचीनतम, समृद्धतम और अनवरत प्रवाहित होने वाली वैचारिक एवं वैज्ञानिक धाराओं में से एक है। यह केवल आध्यात्मिक साधना तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें विज्ञान, गणित, खगोलशास्त्र, चिकित्सा (आयुर्वेद), पर्यावरण, सुशासन, धातु विज्ञान और सामाजिक दर्शन का ऐसा विस्तृत भंडार है जिसने सदियों तक वैश्विक चेतना का मार्गदर्शन किया है। [1]

आधुनिक युग में जब विश्व जलवायु परिवर्तन, मानसिक अशांति, उपभोक्तावादी होड़ और सामाजिक विखंडन जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है, तब भारतीय दृष्टि—जो समग्रता (Holism) और अंतर्संबंधों पर आधारित है—अत्यंत प्रासंगिक हो जाती है। यह शोध पत्र भारतीय ज्ञान परंपरा के मूल तत्वों का विश्लेषण करता है और वर्तमान समय में इसकी व्यावहारिक उपयोगिता तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के संदर्भ में इसकी भूमिका को रेखांकित करता है।

How to cite this article:

शाश्वत चन्देल, सहायक आचार्य, समाजशास्त्र विभागए दिग्विजय नाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालयए गोरखपुरए उत्तर प्रदेश, Anu: a, Mul, Int, Jour, Vol 11, 2026 (Special Issue 2): Pg. No. 7-11

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Published

2026-10-19

How to Cite

चन्देल श. . (2026). भारतीय ज्ञान परंपरा की समकालीन प्रासंगिकता. Anusanadhan: A Multidisciplinary International Journal (In Hindi), 11(Special (Issue) - 2), 7-11. Retrieved from https://thejournalshouse.com/index.php/Anusandhan-Hindi-IntlJournal/article/view/2429