भारतीय शुद्धि सभा का भारतीय समाज पर प्रभाव: एक विवेचनात्मक अध्ययन
Keywords:
भारतीय शुद्धि सभा, शुद्धि आन्दोलन, धार्मिक सुधार, जातिगत भेदभाव, भारतीय समाज, सामाजिक सुधार, स्वामी श्रद्धानन्दAbstract
भारत के इतिहास में उन्नीसवीं और बीसवीं शताब्दी के मध्य का समय सामाजिक, धार्मिक एवं राजनीतिक परिवर्तन के दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण रहा है। उस कालखण्ड में भारतीय समाज अनेक सामाजिक कुप्रथाओं, धार्मिक परम्पराओं, जातिगत असमानताओं और सामाजिक भेदभाव से प्रभावित रहा है। इसी कारण इस समय में अनेक धार्मिक और सामाजिक आन्दोलन भारतीय इतिहास में देखने को मिलते हैं। इन आन्दोलनों का प्रमुख उद्देश्य भारतीय समाज को इन सामाजिक कुरीतियों, धार्मिक कट्टरता और जातीय भेदभाव के प्रति जागरूक करना था जिससे भारत के लोगों के जीवन में सुधार लाया जा सके। शुद्धि आन्दोलन भी इसी प्रकार के आन्दोलनों में से एक महत्वपूर्ण आन्दोलन था। भारतीय शुद्धि सभा द्वारा संचालित शुद्धि आन्दोलन का प्रमुख उद्देश्य उन लोगों को दोबारा हिन्दू धर्म में लाना था, जिन्होंने पहले किसी कारण से कोई अन्य धर्म अपना लिया था, जिसमें भारतीय शुद्धि सभा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालाँकि शुद्धि आन्दोलन मात्र धार्मिक आन्दोलन तक सीमित नहीं रहा बल्कि इसने सामाजिक व्यवस्था, धार्मिक जागृति, शिक्षा, जातिगत भेदभाव में सुधार जैसे प्रमुख विषयों को भी महत्व दिया। इसी कारण से शुद्धि आन्दोलन के कुछ कार्यों को लेकर उस समय के समाज में मतभेद दिखाई पड़ते हैं जबकि भारतीय शुद्धि सभा द्वारा किये गये कार्य उस समय की धार्मिक एवं सामाजिक परिस्थिति का परिणाम थे जिसने समाज के हर एक वर्ग को अपने विचारों और कार्यों से प्रभावित किया। भारतीय शुद्धि सभा का अध्ययन बीसवीं शताब्दी में हो रहे सामाजिक एवं धार्मिक परिवर्तनों को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता है।
How to cite this article:
अनीता गोस्वामी, सुमित कुमार, भारतीय शुद्धि सभा का भारतीय समाज पर प्रभाव: एक विवेचनात्मक अध्ययन, Anu: a, Mul, Int, Jour, 2026; 11(1&2): 68-73.
DOI: https://doi.org/10.24321/2456.0510.202622
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