‘हिमाचलदरà¥à¤¶à¤¨à¤®à¥â€™ नामक महाकावà¥à¤¯ में वरà¥à¤£à¤¿à¤¤ ऋषि-परमà¥à¤ªà¤°à¤¾ का विवेचन
Keywords:
.Abstract
à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ संसà¥à¤•ृति ऋषि-परमà¥à¤ªà¤°à¤¾ से अनà¥à¤ªà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¿à¤¤ है, न केवल वैदिक गà¥à¤°à¤¨à¥à¤¥à¥‹à¤‚ में अपितॠअनेक लौकिक संसà¥à¤•ृत साहितà¥à¤¯ के गà¥à¤°à¤¨à¥à¤¥à¥‹à¤‚ में à¤à¥€ ऋषि-परामà¥à¤ªà¤°à¤¾ के पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£ मिलते हैं। ऋषियों के बिना à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ संसà¥à¤•ृति के असà¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ की परिकलà¥à¤ªà¤¨à¤¾ करना असमà¥à¤à¤µ है।
वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ काल में संसà¥à¤•ृत महाकावà¥à¤¯à¥‹à¤‚ के लेखन की परमà¥à¤ªà¤°à¤¾ अवरà¥à¤¦à¥à¤§ पà¥à¤°à¤¾à¤¯à¤ƒ पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤¤ होती है। इस संसà¥à¤•ृत महाकावà¥à¤¯ लेखन परमà¥à¤ªà¤°à¤¾ में सितमà¥à¤¬à¤° 2019 में à¤à¤• संसà¥à¤•ृत महाकावà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤•ाषित हà¥à¤† है जो आषà¥à¤•वि के रूप में विखà¥à¤¯à¤¾à¤¤ डॉ. मनोहरलाल आरà¥à¤¯ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ विरचित है।1 इस महाकावà¥à¤¯ में हिमाचल-पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ का समगà¥à¤° वरà¥à¤£à¤¨ 12 सरà¥à¥šà¥‹à¤‚ में कावà¥à¤¯à¤¶à¥ˆà¤²à¥€ में पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ किया गया है। इसमें अनेक सà¥à¤¥à¤²à¥‹à¤‚ पर वैदिक ऋषियों का वरà¥à¤£à¤¨ उपलबà¥à¤§ होता है, जिनका विवेचन करना इस शोधलेख का वरà¥à¤£à¥à¤¯ विषय है।
DOI: https://doi.org/10.24321/2456.0510.202102
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