भारत की विदेश नीति के अंतर्गत अन्य देशों के साथ संबंध
Keywords:
विदेश नीति, विकसित देश, विकासशील देश, पड़ोसी देश राजनयिक संबंध व्यापारिक संबंध, सांस्कृतिक संबंध धार्मिक संबंधAbstract
किसी भी देश की विदेश नीति का उसके इतिहास से गहरा संबंध होता है। भारत भी इसका अपवाद नहीं है। भारतीय विदेश नीति अपनी ऐतिहासिक विरासत से अनेक महत्वपूर्ण तथ्यों को समाहित किए हुए है, जिनकी जड़ें प्राचीन काल से लेकर स्वतंत्रता आंदोलन तक फैली हुई हैं।
शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व तथा विश्व शांति की अवधारणा हजारों वर्षों से भारतीय चिंतन का अभिन्न अंग रही है। महात्मा बुद्ध एवं महात्मा गांधी जैसे महान विचारकों ने अहिंसा, शांति और मानवता के सिद्धांतों को विश्व के समक्ष प्रस्तुत किया, जिनका प्रभाव भारत की विदेश नीति में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। इसी प्रकार भारतीय विदेश नीति में उपनिवेशवाद, साम्राज्यवाद तथा रंगभेद का विरोध भी राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत का परिणाम है।
वर्तमान परिदृश्य में भारत के विश्व के अधिकांश देशों के साथ औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित हैं। प्राचीन काल से ही भारत के विश्व के विभिन्न देशों के साथ व्यापारिक, सांस्कृतिक तथा धार्मिक संबंध रहे हैं। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात भारत ने अधिकांश देशों के साथ मैत्रीपूर्ण एवं सहयोगात्मक संबंध स्थापित किए और उन्हें निरंतर सुदृढ़ बनाया।
भारत वैश्विक मंचों पर सदैव सक्रिय भूमिका निभाता रहा है। वर्ष 1991 में आर्थिक उदारीकरण की नीति अपनाने के बाद भारत ने अंतरराष्ट्रीय आर्थिक क्षेत्र में अपनी स्थिति को और अधिक सशक्त किया। सामरिक दृष्टि से भी भारत ने अपनी सुरक्षा क्षमता को निरंतर विकसित किया है तथा विश्व शांति एवं वैश्विक स्थिरता बनाए रखने में अपनी रचनात्मक भूमिका निभाई है।
यद्यपि पाकिस्तान एवं चीन के साथ भारत के संबंध समय-समय पर तनावपूर्ण रहे हैं, फिर भी भारत ने संवाद एवं कूटनीति के माध्यम से समस्याओं के समाधान का प्रयास किया है। दूसरी ओर, रूस के साथ भारत के लंबे समय से सामरिक एवं रणनीतिक संबंध रहे हैं। इसके अतिरिक्त इज़राइल, फ्रांस, अमेरिका, जापान तथा अन्य अनेक देशों के साथ भी भारत ने रक्षा, व्यापार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, ऊर्जा तथा शिक्षा के क्षेत्रों में व्यापक सहयोग स्थापित किया है।